Saturday, May 23, 2026

अल नीनो और हॉर्मुज संकट से ईंधन, उर्वरक महंगे होंगे, जिससे अगले साल चीनी, कॉफी जैसी फसलें प्रभावित होकर वैश्विक खाद्य महंगाई बढ़ाएंगी.

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नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतें एक बार फिर आसमान छू सकती हैं. सिटी रिसर्च की ताजा ‘कमोडिटीज आउटलुक’ रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यापारिक रुकावट और अल नीनो (El Nino) के बिगड़ते हालात अगले 6 से 12 महीनों में वैश्विक खाद्य मुद्रास्फीति को तेजी से बढ़ा सकते हैं. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि इस साल मई के मध्य तक कृषि उत्पादों की कीमतों में पहले ही 13 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है.

ऊर्जा और उर्वरक संकट से महंगी होगी खेती
सिटी रिसर्च के अनुसार, यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक तनाव या नाकाबंदी रहती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा. इस मार्ग के बाधित होने से कच्चे तेल और कच्चे माल की आपूर्ति रुकेगी, जिससे ईंधन और बिजली की कीमतें बढ़ेंगी. इसके कारण खेती की लागत काफी बढ़ जाएगी.

इसके अलावा, दुनिया भर में उर्वरकों की भारी किल्लत हो सकती है. रासायनिक खाद और पेट्रोलियम आधारित कीटनाशकों की कमी के कारण फसलों की पैदावार में बड़ी गिरावट आने की आशंका है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब जीवाश्म ईंधन महंगा होता है, तो मक्का और गन्ने जैसी खाद्य फसलों का उपयोग बड़े पैमाने पर बायोफ्यूल बनाने के लिए होने लगता है. इससे इंसानों के खाने के लिए अनाज की आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ती हैं.

मौसम की मार, अल नीनो का बढ़ता खतरा
सप्लाई चेन में रुकावट के साथ-साथ खराब मौसम भी इस संकट को और गंभीर बना रहा है. अल नीनो के प्रभाव के कारण दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने और कम बारिश होने की संभावना है. पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से एशिया में फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

इन चीजों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दोहरे संकट का सबसे बुरा असर चीनी, कोको और कॉफी जैसी सॉफ्ट कमोडिटीज पर देखने को मिल रहा है. भारत और थाईलैंड में सूखे के कारण चीनी का उत्पादन घटने की आशंका है, जबकि वियतनाम और इंडोनेशिया में पानी की कमी से कॉफी की फसल प्रभावित हो रही है. पश्चिम अफ्रीका में खराब मौसम से कोको की कीमतों में पहले ही रिकॉर्ड उछाल आ चुका है.

अप्रैल तक वैश्विक खाद्य सूचकांकों में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी थी. मध्य पूर्व में जारी तनाव और बदलते मौसम ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे आने वाले महीनों में आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है.

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