भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार तीसरे दिन रौनक बनी रही. निवेशकों में इस बात को लेकर काफी उत्साह देखा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव में कुछ कमी आ सकती है और आगामी वार्ताओं में युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है. इसी सकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए.
बाजार का लेखा-जोखा
कारोबार के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 753.03 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की छलांग लगाकर 79,273.33 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 211.75 अंक यानी 0.87 प्रतिशत बढ़कर 24,576.60 पर पहुंच गया.
बाजार में इस तेजी का मुख्य कारण हैवीवेट शेयरों में खरीदारी और पश्चिम एशिया में कम होते भू-राजनीतिक तनाव को माना जा रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी खरीदारी देखी गई, जो यह दर्शाता है कि बाजार का मूड हर तरफ सकारात्मक है.
सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन
आज के कारोबार में FMCG और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा चमक दिखी. निफ्टी के टॉप गेनर्स में नेस्ले इंडिया, ट्रेंट और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर शामिल रहे, जिन्होंने इंडेक्स को ऊपर ले जाने में बड़ी भूमिका निभाई. दूसरी ओर, फार्मा सेक्टर आज दबाव में रहा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बनकर उभरा.
तकनीकी नजरिया
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 24,600 का स्तर एक तत्काल बाधा (Resistance) बना हुआ है. यदि बाजार इस स्तर को पार कर वहां टिकने में सफल रहता है, तो निफ्टी जल्द ही 24,850 और उसके बाद 25,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू सकता है. नीचे की तरफ, 24,350–24,400 का क्षेत्र अब एक मजबूत सपोर्ट जोन बन गया है.
भू-राजनीतिक घटनाक्रम और चुनौतियां
बाजार की नजर अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता पर है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी शामिल होने की संभावना है. हालांकि, स्थिति अभी भी नाजुक है. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि ईरान धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेगा. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि युद्धविराम की समय सीमा से पहले समझौता नहीं होता, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है.
फिलहाल, मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भारतीय बाजारों को सहारा दिया है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक मोर्चे पर शांति की खबरें आती हैं, तो बाजार अपनी इस तेजी को जारी रख सकता है.


