बिहार के स्वास्थ्य विभाग में एक अनोखा मामला सामने आया है। लगभग 19 आयुष डॉक्टरों ने नियुक्ति के लगभग डेढ़ वर्ष बाद विभाग में योगदान करने की अनुमति मांगी थी। सामान्य प्रशासन की सहमति के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन डॉक्टरों को योगदान करने की अनुमति दे दी है। इन डॉक्टरों की नियुक्ति पिछले वर्ष हुई थी, लेकिन उन्होंने अभी तक पदभार ग्रहण नहीं किया था। विभाग ने अब उन्हें 15 दिनों के भीतर योगदान करने का निर्देश दिया है।
पटना। स्वास्थ्य विभाग में एक अनोखा मामला आया है। विभाग को करीब डेढ़ दर्जन आयुष डॉक्टरों ने विभाग में नियुक्ति का हवाला देकर योगदान की अनुमति मांगी है। महत्वपूर्ण यह है कि इन आयुष डॉक्टरों ने नियुक्ति के करीब डेढ़ वर्ष के बाद योगदान की अनुमति के लिए आग्रह पत्र दिया है।
जिन पर विचार करने के बाद अब सामान्य प्रशासन की सहमति के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने इन डॉक्टरों को विभाग में योगदान की अनुमति दे दी है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष मार्च महीने में स्वास्थ्य विभाग ने आयुर्वेदिक, यूनानी और होमियोपैथिक डॉक्टरों की बहाली प्रक्रिया शुरू की थी। जिन डॉक्टरों का बाद में चयन किया गया उनमें से करीब 19 आयुष डॉक्टरों ने पद पर योगदान नहीं किया।
साल भर बीतने के बाद भी न तो डॉक्टरों ने योगदान दिया और न ही विभाग ने इनका नियुक्ति आर्डर ही निरस्त किया।
अब करीब डेढ़ वर्ष बाद 19 आयुष डॉक्टरों ने विभाग से योगदान की अनुमति मांगी है। डेढ़ वर्ष बाद योगदान की अनुमति मांगने के आलोक में स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग से राय मांगी।
सूत्रों ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने समीक्षा के बाद डॉक्टरों का योगदान लेने की अनुमति दे दी है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित डॉक्टरों को 15 दिनों में विभाग में योगदान के निर्देश दिए हैं।
इन्हें यह भी स्पष्ट किया गया है कि चूंकि इन्होंने अपने पद पर अपनी मर्जी से विलंब से योगदान दिया है लिहाजा इन्हें वेतन वगैरह का भुगतान योगदान की तिथि से दिया जाएगा न कि नियुक्ति की तिथि से।


