नई दिल्ली: देशभर के वाहन चालकों और कार खरीदारों के बीच पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही असमंजस की स्थिति पर सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है. सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान देश के महत्वाकांक्षी ई20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) प्रोग्राम को सिर्फ एक ‘प्रयोग’ बताया है. इस खबर के वायरल होने के बाद अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर इन दावों को पूरी तरह से खारिज और भ्रामक करार दिया है.
अदालत में क्या है असली विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की तकनीक या उसकी गुणवत्ता से नहीं, बल्कि इसकी भारी मात्रा में हो रही पैदावार से जुड़ा है. वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के भीतर देश की बड़ी सरकारी तेल कंपनियों (OMCs जैसे IOCL, BPCL, HPCL) और इथेनॉल बनाने वाली निजी फैक्ट्रियों के बीच एक व्यावसायिक विवाद चल रहा है.
- साल 2021-2022 में जब केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा था, तब यह माना जा रहा था कि इतनी बड़ी मात्रा में इथेनॉल तैयार करना मुश्किल होगा. कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने सस्ते लोन, ब्याज पर सब्सिडी और बिना किसी बाधा के सरकारी मंजूरियां दीं. इसका नतीजा यह हुआ कि कई बड़े व्यापारियों ने फैक्ट्रियां लगा दीं और देश में उम्मीद से कहीं ज्यादा इथेनॉल का उत्पादन होने लगा.
- फैक्ट्रियों और तेल कंपनियों के बीच संकट
अब समस्या यह खड़ी हो गई है कि तेल कंपनियां पेट्रोल में केवल 20% तक ही इथेनॉल मिला सकती हैं, इसलिए वे एक सीमित मात्रा में ही इसे खरीद रही हैं. दूसरी तरफ, इथेनॉल उत्पादक फैक्ट्रियों को अपना बचा हुआ स्टॉक किसी और को बेचने की कानूनी अनुमति नहीं है. मांग से अधिक सप्लाई होने के कारण फैक्ट्रियों के पास स्टॉक का अंबार लग गया है. इस वजह से कई राज्यों के हाई कोर्ट में फैक्ट्रियों ने तेल कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज कराए हैं, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट में एक साथ ट्रांसफर कर सुना जा रहा है. - भविष्य की तैयारी: E22 से E30 पर काम शुरू
सरकार ने साफ किया है कि ई20 के सभी जरूरी टेस्ट पहले ही पूरे हो चुके हैं और यह पूरी तरह सुरक्षित है. इतना ही नहीं, सरकार अब भविष्य को देखते हुए E22, E25, E27 और E30 (30% इथेनॉल मिश्रण) जैसे और ऊंचे स्तरों के ट्रायल भी शुरू कर चुकी है.
अक्टूबर 2026 से पहले समाधान जरूरी
इस विवाद का जल्द निपटारा होना बेहद जरूरी है क्योंकि अक्टूबर 2026 से तेल कंपनियों और इथेनॉल फैक्ट्रियों के बीच नए सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट शुरू होने वाले हैं. इसके समाधान के तौर पर सरकार को अब E85 और E100 (100% इथेनॉल) से चलने वाले वाहनों को तेजी से बाजार में उतारना होगा, ताकि बचे हुए इथेनॉल की खपत की जा सके. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को ‘यथास्थिति’ बनाए रखने का आदेश दिया है.


