मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। मंगलवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 382 अंक से अधिक नीचे आ गया, जबकि निफ्टी भी करीब 98 अंक टूटकर लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर हुई और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला।
सेंसेक्स 75,750 के स्तर के आसपास
शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 382.25 अंक की गिरावट के साथ 75,750.56 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी 97.80 अंक टूटकर 23,681.80 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
इससे पहले सोमवार को भी दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब 0.50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में मंगलवार की शुरुआती कमजोरी के साथ बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन दबाव बना रहा।
97 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख चिंता बनी हुई है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 0.54 प्रतिशत बढ़कर 97.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बाजार में आशंका है कि पश्चिम एशिया के तनाव का असर तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़ी संभावित बाधाओं को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव
शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स में शामिल महिंद्रा एंड महिंद्रा, ट्रेंट, सन फार्मा, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और टीसीएस गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
हालांकि, बाजार के कुछ हिस्सों में खरीदारी भी नजर आई। रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कुछ शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एटरनल और अडानी पोर्ट्स बढ़त बनाने वाले शेयरों में शामिल रहे।
आगे भी उतार-चढ़ाव की आशंका
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल निवेशकों का ध्यान वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर टिका हुआ है। अमेरिकी बाजारों के रुख और एशियाई बाजारों में मिले-जुले संकेतों के बीच पश्चिम एशिया का तनाव बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक स्थिति में स्पष्टता नहीं आती और तेल की कीमतों को लेकर दबाव कम नहीं होता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
