Saturday, October 24, 2026

VC दिनेश सिंह के कमेटी गठन पर उठे सवाल, राज्यपाल की अनुमति नहीं लेने का आरोप.

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रांची | 24 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह के एक आदेश को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आरोग्यम कॉलेज ऑफ एजुकेशन को एमपीएड (M.P.Ed) कोर्स के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) देने की प्रक्रिया के तहत निरीक्षण समिति का गठन किया है। आरोप है कि यह कदम उठाने से पहले राज्यपाल की अनुमति नहीं ली गई, जबकि कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां सीमित किए जाने के कारण ऐसी अनुमति आवश्यक थी।

आरोग्यम कॉलेज के लिए बनाई गई निरीक्षण समिति

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुलपति दिनेश सिंह के आदेश पर आरोग्यम कॉलेज ऑफ एजुकेशन को एमपीएड यानी मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन पाठ्यक्रम के लिए एनओसी देने के उद्देश्य से निरीक्षण समिति बनाई गई है।

समिति में विश्वविद्यालय के साइंस फैकल्टी के डीन को अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, श्रवण कुमार और मृत्युंजय कुमार को सदस्य के रूप में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।

समिति का गठन कॉलेज को पाठ्यक्रम संचालन के लिए एनओसी देने की प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, निरीक्षण की तारीख और समिति की ओर से अब तक की गई कार्रवाई के बारे में उपलब्ध रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

राज्यपाल की अनुमति नहीं लेने का आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुलपति की वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां जब्त या सीमित किए जाने के बाद समिति गठित करने के लिए राज्यपाल की अनुमति लेना आवश्यक था। इसी आधार पर दिनेश सिंह के आदेश पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कुलपति की शक्तियों को लेकर जारी आधिकारिक आदेश में क्या शर्तें निर्धारित की गई थीं और क्या निरीक्षण समिति गठित करने के लिए राज्यपाल की पूर्व अनुमति अनिवार्य थी।

उपलब्ध जानकारी में संबंधित आदेश की प्रति या विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष शामिल नहीं है। इसलिए अनुमति की अनिवार्यता और आदेश की वैधता की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख पर नजर

आरोग्यम कॉलेज ऑफ एजुकेशन को एमपीएड पाठ्यक्रम के लिए एनओसी देने की प्रक्रिया में निरीक्षण समिति की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में समिति के गठन, उसके अधिकार क्षेत्र और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और राजभवन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि समिति का गठन लागू नियमों के अनुरूप किया गया या नहीं।

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