Wednesday, November 4, 2026

US Veto Power: अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कितना ताकतवर है वीटो का अधिकार? क्या कांग्रेस इसे पलट सकती है, जानें पूरा नियम

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नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस में उनके साथ सहयोग नहीं करती है, तो वे वीटो पावर का इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में झटका लगने के बाद उनका यह बयान चर्चा में है।

अमेरिका में राष्ट्रपति के पास कांग्रेस से पारित विधेयकों को रोकने का संवैधानिक अधिकार होता है। इसे वीटो पावर कहा जाता है। हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस के पास भी राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का अधिकार है। इसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। आइए समझते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति की वीटो शक्ति कैसे काम करती है और यह भारत के राष्ट्रपति की शक्तियों से कितनी अलग है।

अमेरिकी कांग्रेस क्या है और इसके कितने सदन हैं?

अमेरिकी संसद को कांग्रेस कहा जाता है। इसके दो सदन हैं:

  • हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा): इसमें 435 मतदान करने वाले सदस्य होते हैं। सदस्यों का कार्यकाल दो साल का होता है।
  • सीनेट: यह अमेरिकी कांग्रेस का दूसरा सदन है।

अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस से पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति उसे स्वीकार कर सकते हैं या वीटो लगाकर वापस भेज सकते हैं।

क्या है अमेरिकी राष्ट्रपति की वीटो पावर?

वीटो का अर्थ है किसी विधेयक को कानून बनने से रोकने के लिए राष्ट्रपति की ओर से असहमति जताना। अमेरिका में राष्ट्रपति कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित किसी विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं।

संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को विधेयक पर कार्रवाई करने के लिए रविवार को छोड़कर 10 दिन का समय मिलता है। यदि इस अवधि में राष्ट्रपति कोई कार्रवाई नहीं करते और कांग्रेस का सत्र जारी रहता है, तो विधेयक अपने आप कानून बन सकता है।

वीटो की आशंका का असर विधेयक तैयार करने के दौरान भी पड़ सकता है। राष्ट्रपति की असहमति की संभावना को देखते हुए सांसद विधेयक में बदलाव कर सकते हैं।

अमेरिका में वीटो के कितने प्रकार हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति के पास मुख्य रूप से दो तरह के वीटो का अधिकार होता है।

1. रेगुलर वीटो (सामान्य वीटो)

इसमें राष्ट्रपति विधेयक पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हैं और उसे आपत्तियों के साथ कांग्रेस के उस सदन में वापस भेज देते हैं, जहां से विधेयक आया था।

हालांकि, कांग्रेस के दोनों सदन यदि दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित कर देते हैं, तो राष्ट्रपति का वीटो निष्प्रभावी हो जाता है और विधेयक कानून बन सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन ने 5 अप्रैल 1792 को पहली बार रेगुलर वीटो का इस्तेमाल किया था। 3 मार्च 1845 को कांग्रेस ने पहली बार राष्ट्रपति जॉन टायलर के वीटो को सफलतापूर्वक पलटा था।

2. पॉकेट वीटो (Pocket Veto)

यदि राष्ट्रपति के पास विधेयक पहुंचने के बाद 10 दिनों की संवैधानिक अवधि में कांग्रेस का सत्र समाप्त हो जाता है और राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर नहीं करते, तो विधेयक कानून नहीं बनता। इसे पॉकेट वीटो कहा जाता है।

क्या अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति का वीटो पलट सकती है?

हां, अमेरिकी कांग्रेस राष्ट्रपति के वीटो को पलट सकती है। इसके लिए प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई बहुमत से विधेयक को दोबारा पारित करना जरूरी है।

यह व्यवस्था राष्ट्रपति और विधायिका के बीच शक्तियों का संतुलन बनाए रखती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत हासिल करना आसान नहीं होता।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1789 से अब तक लगाए गए 1,484 सामान्य वीटो में से केवल 106 को ही कांग्रेस पलट सकी है। यानी लगभग 7.1 प्रतिशत वीटो ही निष्प्रभावी किए जा सके हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के कितने वीटो पलटे गए?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दोनों कार्यकालों को मिलाकर 12 बार वीटो का इस्तेमाल किया है। इनमें से एक बार कांग्रेस उनके वीटो को पलटने में सफल रही।

पहले कार्यकाल में उनके सभी 10 वीटो वर्ष 2019 में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने के बाद आए थे। इनमें राष्ट्रीय आपातकाल, यमन में अमेरिकी भागीदारी, हथियारों की बिक्री और शिक्षा विभाग से जुड़े मामले शामिल थे।

मई 2020 में ट्रंप ने ईरान वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर वीटो लगाया था। सीनेट में इसे पलटने के लिए 49-44 से मतदान हुआ, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण वीटो बरकरार रहा।

हालांकि, नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट 2021 के मामले में कांग्रेस ने ट्रंप का वीटो पलट दिया था। प्रतिनिधि सभा ने 322-87 और सीनेट ने 81-13 के मतों से विधेयक को दोबारा पारित किया था।

दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने 29 दिसंबर 2025 को जल परियोजना और आदिवासी भूमि से जुड़े दो विधेयकों पर वीटो लगाया था। खबर के मुताबिक, कांग्रेस ने इन दोनों मामलों में उनके वीटो को बरकरार रखा।

किन अमेरिकी राष्ट्रपतियों के वीटो सबसे ज्यादा पलटे गए?

अमेरिकी इतिहास में कई राष्ट्रपतियों को कांग्रेस के विरोध का सामना करना पड़ा है।

  • फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट (1933-1945): उन्होंने कुल 635 बार वीटो का इस्तेमाल किया। इनमें से 9 को कांग्रेस ने पलटा।
  • एंड्रयू जॉनसन (1865-1869): उनके 29 वीटो में से 15 को कांग्रेस ने निष्प्रभावी कर दिया। इनमें सिविल राइट्स एक्ट 1866 भी शामिल था।
  • रिचर्ड निक्सन (1969-1974): कांग्रेस ने उनके वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पर लगाए गए वीटो को पलट दिया था।
  • जॉर्ज डब्ल्यू. बुश (2001-2009): डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के बाद उन्होंने 2007 और 2008 में 11 बार वीटो का इस्तेमाल किया। इनमें से चार वीटो पलट दिए गए।
  • बराक ओबामा (2009-2017): उनके कार्यकाल में एक बार कांग्रेस ने वीटो पलटा। यह सितंबर 2016 में 11 सितंबर हमले के पीड़ितों के परिवारों को सऊदी अरब के खिलाफ मुकदमा करने का अधिकार देने वाले कानून से जुड़ा था।
  • जो बाइडन (2021-2025): उन्होंने 13 बार वीटो का इस्तेमाल किया, लेकिन कांग्रेस इनमें से किसी को भी नहीं पलट सकी।

भारत और अमेरिका के राष्ट्रपति की वीटो शक्ति में क्या अंतर है?

भारत और अमेरिका में राष्ट्रपति की वीटो शक्ति के नियम अलग-अलग हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के पास कांग्रेस के विधेयकों को रोकने की अधिक प्रभावी शक्ति है, जबकि भारत में राष्ट्रपति की भूमिका संसदीय व्यवस्था और मंत्रिपरिषद की सलाह से जुड़ी होती है।

अमेरिका में:

  • राष्ट्रपति कांग्रेस से पारित विधेयक पर वीटो लगा सकते हैं।
  • कांग्रेस के दोनों सदन दो-तिहाई बहुमत से विधेयक दोबारा पारित कर वीटो पलट सकते हैं।
  • कुछ परिस्थितियों में राष्ट्रपति की ओर से हस्ताक्षर नहीं करने पर पॉकेट वीटो लागू हो सकता है।

भारत में:

  • राष्ट्रपति किसी गैर-धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद के पास वापस भेज सकते हैं।
  • यदि संसद विधेयक को दोबारा पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति को उस पर अपनी सहमति देनी होती है।
  • संविधान में राष्ट्रपति के लिए विधेयक पर निर्णय लेने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई है। कुछ परिस्थितियों में विधेयक को लंबित रखने की स्थिति को पॉकेट वीटो कहा जाता है।

ट्रंप के सामने अब क्या चुनौती होगी?

अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति कमजोर होने के बाद ट्रंप को विधेयक पारित कराने के लिए डेमोक्रेटिक सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। यदि दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वहीं, कांग्रेस के पास भी दो-तिहाई बहुमत जुटाकर राष्ट्रपति के वीटो को पलटने का संवैधानिक विकल्प मौजूद है। ऐसे में आने वाले समय में राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना बनी रह सकती है।

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