Tuesday, April 28, 2026

UIDAI के अनुसार आधार केवल पहचान का प्रमाण है, जन्म तिथि का नहीं, क्योंकि यह अक्सर दस्तावेजों के बिना ‘स्व-घोषणा’ पर आधारित होता है.

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नई दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड अब जन्म तिथि के वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा. लंबे समय से लोग पहचान पत्र के साथ-साथ उम्र के प्रमाण के लिए भी आधार का उपयोग करते आ रहे थे, लेकिन UIDAI के इस नए निर्देश ने अब इस व्यवस्था को बदल दिया है.

UIDAI ने क्यों लिया यह फैसला?
UIDAI द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, आधार मुख्य रूप से एक पहचान प्रमाण है, न कि जन्म तिथि का दस्तावेज. इसके पीछे कई तकनीकी और कानूनी कारण बताए गए हैं:

आधार अधिनियम, 2016 की सीमाएं: UIDAI ने स्पष्ट किया कि ‘आधार अधिनियम 2016’ के तहत, आधार कार्ड केवल पहचान स्थापित करने के लिए है. इस कानून में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि इसे जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

स्व-घोषणा: नामांकन या अपडेट के समय, कई मामलों में जन्म तिथि व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी या ‘दावे’ के आधार पर दर्ज की जाती है. यदि किसी के पास दस्तावेज नहीं होते, तो सिस्टम में जन्म तिथि “अनुमानित” दर्ज कर दी जाती है, जो अक्सर 1 जनवरी के रूप में दिखाई देती है.

न्यायालयों का रुख: हाल के दिनों में कई उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसलों में कहा है कि आधार का उद्देश्य केवल बायोमेट्रिक्स के जरिए व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करना है. यह जन्म पंजीकरण का विकल्प नहीं हो सकता.

अब क्या होंगे जन्म तिथि के वैध विकल्प?
UIDAI के इस स्पष्टीकरण के बाद, अब स्कूलों में दाखिले, पेंशन योजनाएं या अन्य सरकारी सेवाओं के लिए आधार के स्थान पर अन्य दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी. जन्म तिथि साबित करने के लिए अब निम्नलिखित दस्तावेज मान्य होंगे:

नगर निगम या रजिस्ट्रार द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र.

  • मैट्रिकुलेशन (10वीं) का मार्कशीट या सर्टिफिकेट.
  • पासपोर्ट.
  • पैन कार्ड.

आम जनता पर क्या होगा असर?
UIDAI ने साफ किया है कि आधार केवल यह प्रमाणित करता है कि जो व्यक्ति सेवा या सब्सिडी मांग रहा है, वह वही है जिसके बायोमेट्रिक्स सिस्टम में दर्ज हैं. इसे ‘पॉजिटिव ऑथेंटिकेशन’ कहा जाता है. हालांकि, यदि जन्म तिथि को लेकर कोई विवाद होता है, तो उसकी सत्यता साबित करने की जिम्मेदारी स्वयं आधार धारक की होगी.

UIDAI के इस कदम से डेटा की शुद्धता और कानूनी पारदर्शिता बढ़ेगी. नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी जन्म तिथि के आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए केवल प्रमाणित दस्तावेजों का ही उपयोग करें और आधार को केवल अपनी डिजिटल पहचान के रूप में इस्तेमाल करें.

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