27 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कमजोर शुरुआत की। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले। शुरुआती कारोबार में आईटी, सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला, जबकि फार्मा और सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 122.37 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,484.38 पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 44.40 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,708.80 के स्तर पर खुला।
IT, सीमेंट और ऑयल एंड गैस शेयरों में गिरावट
मंगलवार को शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव नजर आया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इसके अलावा सीमेंट सेक्टर में 0.98 प्रतिशत और ऑयल एंड गैस सेक्टर में 0.53 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में कमजोरी के पीछे वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को प्रमुख कारकों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, शुरुआती कारोबार के ये आंकड़े हैं और बाजार की दिशा दिनभर बदल सकती है।
फार्मा और सरकारी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी
शेयर बाजार में गिरावट के बीच कुछ सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। शुरुआती कारोबार में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 0.68 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.44 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
इससे संकेत मिला कि बाजार में सभी सेक्टरों में एक जैसी बिकवाली नहीं थी। जहां आईटी और सीमेंट शेयर दबाव में रहे, वहीं सरकारी बैंकिंग और फार्मा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
Infosys, TCS और HCL Tech टॉप लूजर्स में शामिल
शुरुआती कारोबार में निफ्टी की प्रमुख कंपनियों में इंफोसिस, एशियन पेंट्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), JSW स्टील और HCL टेक के शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन शेयरों में गिरावट करीब 2.78 प्रतिशत तक पहुंची। आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी के साथ निफ्टी आईटी इंडेक्स भी एक प्रतिशत से ज्यादा नीचे रहा।
कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 4.97 प्रतिशत के स्तर पर रहने से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत के आयात बिल और कंपनियों की लागत पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के निवेश संबंधी फैसलों पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का एक कारण बना हुआ है।
FIIs ने बेचे ₹1,462 करोड़ के शेयर, DIIs की खरीदारी जारी
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के आंकड़े भी बाजार की दिशा समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 1,462 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी लगातार दसवें कारोबारी सत्र में जारी रही। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को कुछ समर्थन दे सकती है, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी नजर रखना जरूरी है।
क्या निफ्टी में फिर आ सकती है तेजी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए 22,630 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके मुताबिक, यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तो 23,000 और 23,500 के स्तर की ओर संभावित रिकवरी की उम्मीद की जा सकती है।
हालांकि, यह विशेषज्ञों का बाजार आकलन है, कोई निश्चित अनुमान नहीं। कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
