सोशल मीडिया को लेकर भारत में लोगों की सोच कई पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आती है। प्यू रिसर्च सेंटर के 37 देशों में किए गए एक वैश्विक सर्वे के मुताबिक, 66 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि सोशल मीडिया का लोकतंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वहीं 23 प्रतिशत लोगों ने इसे लोकतंत्र के लिए नकारात्मक बताया।
यह सर्वे 45 हजार से अधिक लोगों के बीच किया गया। रिपोर्ट में सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके फायदे और चुनौतियों, दोनों को लेकर लोगों की राय सामने आई है।
भारत की राय अमेरिका और यूरोप से अलग
सर्वे के आंकड़ों के अनुसार सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए अच्छा मानने वालों का वैश्विक औसत 55 प्रतिशत है। भारत में यह आंकड़ा इससे काफी अधिक है।
| देश/क्षेत्र | लोकतंत्र पर सकारात्मक असर | नकारात्मक असर |
|---|---|---|
| भारत | 66% | 23% |
| 37 देशों का औसत | 55% | 35% |
| जर्मनी | 37% | 61% |
| अमेरिका | 34% | 64% |
| फ्रांस | 31% | 65% |
| नीदरलैंड | 27% | 70% |
अमेरिका में 64 प्रतिशत लोगों ने सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह बताया। फ्रांस में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत और नीदरलैंड में 70 प्रतिशत रहा।
युवाओं में सोशल मीडिया के प्रति ज्यादा सकारात्मक नजरिया
भारत में उम्र के आधार पर भी लोगों की राय में अंतर दिखाई देता है। सर्वे के अनुसार 18 से 34 वर्ष की उम्र के 74 प्रतिशत भारतीय सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक मानते हैं।
वहीं 35 से 49 वर्ष की उम्र के 69 प्रतिशत लोगों ने इसके पक्ष में राय दी। 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में यह आंकड़ा घटकर 50 प्रतिशत रह गया।
इस तरह सबसे युवा और सबसे बुजुर्ग आयु वर्ग के बीच करीब 24 प्रतिशत अंकों का अंतर देखने को मिला।
फेसबुक और इंस्टाग्राम का बढ़ा इस्तेमाल
रिपोर्ट में भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़े आंकड़े भी दिए गए हैं। इसके मुताबिक 48 प्रतिशत भारतीय वयस्क सर्वे में शामिल पांच प्रमुख प्लेटफॉर्म में से किसी का इस्तेमाल नहीं करते।
जो लोग सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, उनमें फेसबुक 43 प्रतिशत यूजर शेयर के साथ सबसे आगे है। 2023 में इसका आंकड़ा 39 प्रतिशत था।
इंस्टाग्राम के इस्तेमाल में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसका उपयोग करने वाले भारतीय वयस्कों का अनुपात 2023 के 26 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गया।
इसके अलावा स्नैपचैट का इस्तेमाल 18 प्रतिशत और एक्स का इस्तेमाल करीब 7 प्रतिशत भारतीय वयस्क करते हैं। रिपोर्ट में टिकटॉक के लिए 6 प्रतिशत का आंकड़ा दिया गया है, हालांकि भारत में इस प्लेटफॉर्म पर 2020 से प्रतिबंध लागू है।
सोशल मीडिया से जानकारी बढ़ी, लेकिन अफवाह भी चिंता
सर्वे में भारतीयों ने सोशल मीडिया के फायदे के साथ उसके नकारात्मक प्रभावों को भी स्वीकार किया है।
करीब 66 प्रतिशत भारतीयों का कहना है कि सोशल मीडिया के कारण लोग मौजूदा घटनाओं और खबरों के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल कर पा रहे हैं। वहीं 55 प्रतिशत लोगों के अनुसार सोशल मीडिया ने आम नागरिकों को राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज रखने का अवसर दिया है।
दूसरी ओर, 62 प्रतिशत भारतीयों ने माना कि सोशल मीडिया के जरिए झूठी खबरों और अफवाहों को फैलाना आसान हुआ है। वहीं 51 प्रतिशत लोगों को लगता है कि सोशल मीडिया की वजह से राजनीतिक विचारों के आधार पर समाज में विभाजन बढ़ा है।
ज्यादा इस्तेमाल करने वाले यूजर फायदे और नुकसान दोनों समझते हैं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करने वाले युवा और उच्च शिक्षित लोग इसके सकारात्मक प्रभावों को स्वीकार करने के साथ-साथ इससे पैदा होने वाली समस्याओं के प्रति भी अपेक्षाकृत अधिक सजग हैं।
इससे एक ऐसी स्थिति सामने आती है, जिसमें सोशल मीडिया लोगों को ज्यादा जानकारी और अपनी बात रखने का मंच देता है, लेकिन साथ ही फेक न्यूज, अफवाह, वैचारिक ध्रुवीकरण और लोगों को गुमराह करने जैसी चुनौतियां भी बढ़ाता है।
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