मुंबई: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि, कारोबार के अंतिम चरण में IT और निजी बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार ने शुरुआती नुकसान की काफी भरपाई कर ली।
कारोबार समाप्त होने पर BSE सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,781.76 अंक पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 50 में 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की कमजोरी आई और यह 23,398.10 अंक पर पहुंच गया।
शुरुआती दबाव से बाजार ने की रिकवरी
शुक्रवार के सत्र में बाजार की शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर रही। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला।
हालांकि, दिन बढ़ने के साथ कुछ प्रमुख शेयरों में खरीदारी लौटने लगी। खासतौर पर IT और निजी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को और बड़ी गिरावट से बचाने में योगदान दिया।
HDFC Bank समेत इन शेयरों में दिखी मजबूती
शुक्रवार को HDFC Bank, Dr. Reddy’s Laboratories, Tech Mahindra, HDFC Life Insurance और Wipro समेत कुछ प्रमुख शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
HDFC Bank के शेयर पर निवेशकों की विशेष नजर रही। बहरीन में AT-1 बॉन्ड से जुड़े कानूनी मामले में बैंक को मिली राहत के बाद स्टॉक में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
निजी क्षेत्र के बैंकिंग शेयरों में मजबूती ने भी प्रमुख सूचकांकों को संभालने में भूमिका निभाई।
Hindalco बना निफ्टी का सबसे बड़ा गिरने वाला शेयर
दूसरी ओर, मेटल शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा। Hindalco Industries करीब 3.21 प्रतिशत टूटकर ₹981.50 पर बंद हुआ और निफ्टी के प्रमुख लूजर्स में सबसे ऊपर रहा।
इसके अलावा JSW Steel में लगभग 2.99 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। Tata Steel, Eicher Motors और ONGC के शेयर भी कमजोर होकर बंद हुए।
मेटल सेक्टर में व्यापक बिकवाली का असर पूरे बाजार के सेंटीमेंट पर दिखाई दिया।
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें
1. अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से ब्याज दरों की चिंता
अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। वहां उत्पादक महंगाई के ऊंचे आंकड़ों और अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेतों के कारण यह आशंका बनी हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने में जल्दबाजी नहीं करेगा।
ऊंची ब्याज दरों की संभावना से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से भारतीय इक्विटी बाजार में भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय बाजार के लिए एक प्रमुख चिंता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल और व्यापक आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल सकता है।
3. रुपये पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही। शुक्रवार को रुपया लगातार चौथे कारोबारी दिन कमजोर हुआ और सप्ताह के दौरान डॉलर के मुकाबले इसमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब मुद्रा बाजार की दिशा पर भी बनी हुई है। कुछ अनुमानों के मुताबिक निकट अवधि में डॉलर के मुकाबले रुपया 95.15 से 95.80 के दायरे में रह सकता है।
वैश्विक अनिश्चितता से निवेशक सतर्क
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर देखा जा रहा है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम लेने के बजाय चुनिंदा शेयरों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
भारतीय बाजार में भी यही रुझान दिखाई दिया। दिन के दौरान बिकवाली के बावजूद IT और बैंकिंग जैसे कुछ प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखा।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
अगले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों की संभावनाओं, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। इन संकेतकों में बदलाव का असर भारतीय शेयर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। ऊपर दी गई जानकारी केवल समाचार एवं बाजार गतिविधियों की जानकारी के उद्देश्य से है, इसे निवेश सलाह न माना जाए।
