रांची, 6 अक्टूबर 2026: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में लंबे समय से चली आ रही फैकल्टी की कमी को दूर करने की दिशा में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। संस्थान में 12 विशेषज्ञ विभागों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के 22 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इनमें नियमित और बैकलॉग दोनों श्रेणी के पद शामिल हैं।
फैकल्टी की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज, जांच और ऑपरेशन के साथ मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और प्रशिक्षण पर भी पड़ता है। ऐसे में नई नियुक्तियों से संबंधित विभागों की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
CTVS विभाग में सबसे ज्यादा पांच पद
RIMS प्रबंधन ने करीब एक महीने पहले इन पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा 5 पद कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग में हैं।
इसके अलावा मेडिकल ऑन्कोलॉजी में 3 पद निर्धारित किए गए हैं। ऑर्थोपेडिक, न्यूरोसर्जरी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और न्यूरोलॉजी विभाग में 2-2 पद हैं। बाकी रिक्तियां अन्य विशेषज्ञ विभागों में रखी गई हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से बढ़ता है दबाव
RIMS जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर कामकाज पर पड़ सकता है। सीमित संख्या में डॉक्टर होने से मौजूदा फैकल्टी पर मरीजों का दबाव बढ़ता है।
जटिल बीमारियों के मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ सकता है। जांच और सर्जरी से जुड़ी सेवाओं पर भी इसका असर पड़ने की संभावना रहती है।
मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को भी मिलेगा लाभ
फैकल्टी की कमी केवल मरीजों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मेडिकल शिक्षा पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता कम होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ क्लिनिकल ट्रेनिंग में भी सीमित अवसर मिल सकते हैं।
नई नियुक्तियों के बाद छात्रों को संबंधित विशेषज्ञता वाले शिक्षकों से नियमित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलने की संभावना है। इससे पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव को भी बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मरीजों को क्या फायदा होगा?
नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के आने से संबंधित विभागों में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी। इससे मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श, जांच और उपचार के लिए अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
साथ ही मौजूदा डॉक्टरों पर काम का दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे विभागीय सेवाओं को व्यवस्थित करने और मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
नियुक्ति प्रक्रिया से उम्मीदें बढ़ीं
RIMS में 22 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को विशेषज्ञ विभागों में मानव संसाधन मजबूत करने की अहम पहल माना जा रहा है। नियुक्तियां पूरी होने के बाद इसका असर अस्पताल की चिकित्सा सेवाओं के साथ मेडिकल शिक्षा और प्रशिक्षण पर भी पड़ने की उम्मीद है।
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