रांची: विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर रिम्स के मनोचिकित्सा विभाग ने गुरुवार को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें मेडिकल इंटर्न, मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक संकट के संकेत पहचानने तथा जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता उपलब्ध कराने के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मानसिक परेशानियों से जूझ रहे व्यक्ति के साथ संवेदनशील बातचीत और समय पर सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। लोगों से अपील की गई कि किसी व्यक्ति की भावनात्मक परेशानी को नजरअंदाज न करें।
आम लोग भी निभा सकते हैं मददगार की भूमिका
मनोचिकित्सा विभाग के प्रो. डॉ. मेजर अजय कुमार बाखला और डॉ. विद्या के. एल. ने इंटर्न, ओपीडी और वार्ड में मरीजों तथा उनके परिजनों से संवाद किया।
प्रो. बाखला ने बताया कि संकट की स्थिति में केवल विशेषज्ञों की भूमिका नहीं होती। परिवार, दोस्त, सहकर्मी या आसपास मौजूद कोई भी संवेदनशील व्यक्ति शुरुआती स्तर पर मददगार बन सकता है। ऐसे लोगों को संकट के संकेत पहचानने और जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को उचित सहायता तक पहुंचाने वाला ‘गेटकीपर’ माना जाता है।
RQPR मॉडल के बारे में दी जानकारी
कार्यक्रम में RQPR मॉडल के जरिए संकट में मौजूद व्यक्ति की मदद करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके तहत पहले परेशानी के संकेतों को पहचानना, फिर सहानुभूति के साथ बातचीत करना, सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना और आवश्यकता होने पर डॉक्टर या उपयुक्त सेवा तक पहुंचाना शामिल है।
विशेषज्ञों ने कहा कि किसी परेशान व्यक्ति को अकेले समस्या से जूझने देने के बजाय उसके साथ रहना और सही मदद तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े भ्रम दूर किए
जागरूकता सत्र में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या से जुड़े कुछ आम भ्रमों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी व्यक्ति से सीधे उसकी मानसिक स्थिति या आत्महत्या से जुड़े विचारों के बारे में पूछना अपने आप में उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित नहीं करता। इसके बजाय, संवेदनशील बातचीत से व्यक्ति को अपनी परेशानी साझा करने का अवसर मिल सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि गंभीर भावनात्मक संकट केवल मानसिक बीमारी की वजह से ही नहीं हो सकता। अत्यधिक तनाव या कठिन परिस्थितियां भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे समय में परिवार और आसपास के लोगों का सहयोग अहम हो जाता है।
RIMS में उपलब्ध है मनोरोग परामर्श
रिम्स में सभी कार्यदिवसों पर ओपीडी के माध्यम से निःशुल्क मनोरोग परामर्श की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई। जरूरत पड़ने पर टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के जरिए भी सहायता ली जा सकती है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को छिपाने के बजाय बातचीत और समय पर उचित सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
