रांची: राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में गुरुवार को डिस्लिपिडेमिया यानी शरीर में कोलेस्ट्रॉल और अन्य रक्त वसा के असंतुलन से संबंधित विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन Association of Medical Biochemists of India (AMBI) के झारखंड चैप्टर की ओर से किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन RIMS निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा ने किया। इस दौरान संस्थान के डीन डॉ. राजीव मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हीरेंद्र बिरुआ, विभिन्न विभागों के प्रमुख, चिकित्सक और स्नातकोत्तर (PG) विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बीमारी की जांच और उपचार पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी
CME के दौरान विशेषज्ञों ने डिस्लिपिडेमिया की पहचान, जांच और उपचार से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही, शरीर के अलग-अलग अंगों पर इसके संभावित प्रभावों के बारे में भी PG छात्रों को जानकारी दी गई।
फार्माकोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. आभा ने कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने के लिए उपलब्ध नई दवाओं और उनके उपयोग पर जानकारी साझा की। मेडिसिन विभाग के अपर प्राध्यापक डॉ. अभय कुमार ने इन दवाओं से जुड़े संभावित दुष्प्रभावों पर चर्चा की।
डॉ. क्षितिज ने डिस्लिपिडेमिया के मस्तिष्क पर प्रभाव के बारे में बताया, जबकि डॉ. प्रज्ञा पंत ने किडनी पर इसके असर की जानकारी दी। बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने लिपिड प्रोफाइल जांच और उसकी रिपोर्ट को समझने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पोस्टर और क्विज में शामिल हुए PG छात्र
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में PG विद्यार्थियों ने डिस्लिपिडेमिया से संबंधित विषयों पर पोस्टर प्रस्तुत किए। इसके बाद MD छात्रों के लिए वैज्ञानिक क्विज आयोजित की गई। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
RIMS निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा ने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक आयोजन PG विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए शोध और वैज्ञानिक प्रगति से परिचित कराने में उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि नई जानकारी से चिकित्सकों को मरीजों के उपचार में बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। उन्होंने AMBI के झारखंड चैप्टर की पहल की सराहना भी की।
CME को मिले दो क्रेडिट आवर्स
AMBI के झारखंड चैप्टर का गठन हाल में डॉ. संतोष कुमार के प्रयासों से हुआ है। संगठन की ओर से चिकित्सा शिक्षा से जुड़े CME और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस CME के लिए झारखंड मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. विमलेश सिंह की ओर से 2 क्रेडिट आवर्स प्रदान किए गए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बायोकेमिस्ट्री विभाग के फैकल्टी सदस्यों, सीनियर रेजिडेंट, PG विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने सहयोग किया। आयोजन में डॉ. बेला, डॉ. तारिक, डॉ. अनुपा, डॉ. मुकेश, डॉ. शिशिर, SR डॉ. निवेदिता, डॉ. आशा, डॉ. मृदुला और डॉ. श्वेता समेत कई PG छात्रों की भूमिका रही।
