Friday, July 17, 2026

RBI का बड़ा फैसला: डिफॉल्टर्स अब जब्त संपत्ति दोबारा नहीं खरीद सकेंगे, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम.

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मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और डिफॉल्ट मामलों में संभावित अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ‘स्ट्रेस्ड एसेट्स डायरेक्शन-2026’ के तहत अब ऋण चूक करने वाले उधारकर्ता (डिफॉल्टर्स) और उनसे जुड़े व्यक्ति या संस्थाएं बैंकों द्वारा जब्त की गई संपत्तियों को दोबारा नहीं खरीद सकेंगे।

ये नियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे। वहीं, पहले से बैंकों के कब्जे में मौजूद संपत्तियों के लिए 30 सितंबर 2027 तक अनुपालन की समय-सीमा तय की गई है।

डिफॉल्टर्स पर सख्ती

आरबीआई के अनुसार, नए नियमों का उद्देश्य ऐसी स्थितियों को रोकना है, जिनमें डिफॉल्टर कथित तौर पर अपने सहयोगियों, रिश्तेदारों या संबद्ध कंपनियों के माध्यम से जब्त संपत्तियां कम कीमत पर वापस हासिल कर लेते थे। अब इस तरह के लेनदेन पर रोक रहेगी और संबंधित पक्षों की पहचान दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।

सात वर्षों के भीतर करनी होगी संपत्ति की बिक्री

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बैंक और वित्तीय संस्थानों का मुख्य कार्य संपत्ति का स्वामित्व बनाए रखना नहीं है। इसलिए जब्त की गई अचल संपत्तियों को अधिकतम सात वर्षों के भीतर बेचना होगा। बिक्री की प्रक्रिया मुख्य रूप से SARFAESI Act, 2002 के तहत सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से पूरी की जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

मूल्यांकन और लेखांकन के लिए नए मानक

नए दिशा-निर्देशों में संपत्तियों के मूल्यांकन और लेखांकन को लेकर भी कई प्रावधान किए गए हैं।

  • संपत्ति का मूल्यांकन कम से कम दो स्वतंत्र वैल्यूअर्स से कराया जाएगा।
  • हर दो वर्ष में संपत्ति का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
  • यदि संपत्ति का मूल्य घटता है, तो उस नुकसान को बैंक को अपने प्रॉफिट एंड लॉस (P&L) खाते में दर्ज करना होगा।
  • मूल्य बढ़ने की स्थिति में उसे तत्काल लाभ के रूप में नहीं माना जाएगा।
  • जब्त संपत्तियों को पारंपरिक एनपीए (NPA) श्रेणी से अलग बैलेंस शीट में अलग मद के तहत दर्शाया जाएगा।

बोर्ड से स्वीकृत नीति बनानी होगी

आरबीआई ने सभी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों के अनुरूप बोर्ड की मंजूरी से विस्तृत नीति तैयार करें और संपत्तियों के प्रबंधन एवं निस्तारण की प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुसार लागू करें।

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