Wednesday, September 16, 2026

RBI के नए नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल से डिजिटल भुगतान के लिए सिर्फ OTP काफी नहीं होगा; बायोमेट्रिक और पिन अनिवार्य होंगे.

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नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन और उसके साथ बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लिया है. 1 अप्रैल 2026 से देश में ऑनलाइन पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है. RBI ने डिजिटल भुगतान के लिए नए सुरक्षा मानक जारी किए हैं, जिसके तहत अब केवल एक OTP (One-Time Password) के भरोसे लेनदेन करना संभव नहीं होगा.

क्या है नया नियम?
RBI की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब सभी डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए ‘मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ (MFA) अनिवार्य होगा. वर्तमान में, अधिकांश लेनदेन टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) पर आधारित हैं, जिसमें अक्सर एक पासवर्ड/पिन और एक SMS-आधारित OTP का उपयोग होता है. लेकिन अब RBI ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के इन दो कारकों में से कम से कम एक ‘डायनेमिक’ होना चाहिए, यानी वह हर ट्रांजैक्शन के लिए बिल्कुल नया और अलग होना चाहिए.

OTP के अलावा क्या होंगे विकल्प?
साइबर अपराधी अक्सर ‘सिम स्वैपिंग’ या ‘फिशिंग’ के जरिए ग्राहकों का OTP चुरा लेते हैं. इसे रोकने के लिए अब बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अन्य विकल्पों को बढ़ावा देना होगा, जैसे:

  • बायोमेट्रिक्स: फिंगरप्रिंट स्कैन, फेस आईडी या आईरिस स्कैन.
  • इन-ऐप नोटिफिकेशन: बैंक के आधिकारिक ऐप पर ट्रांजैक्शन को ‘Approve’ करने का विकल्प.
  • हार्डवेयर टोकन: विशेष रूप से बड़े बिजनेस ट्रांजैक्शन के लिए एक अलग डिवाइस.

रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन और जिम्मेदारी
नियमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन’ है. इसका मतलब है कि बैंक ग्राहक के खर्च करने के पैटर्न और लोकेशन की निगरानी करेंगे. यदि कोई लेनदेन संदिग्ध लगता है या बड़ी राशि का है, तो सिस्टम स्वतः ही अतिरिक्त सुरक्षा जांच मांगेगा. सबसे बड़ी राहत ग्राहकों के लिए यह है कि यदि कोई बैंक इन नए सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करता और ग्राहक के साथ फ्रॉड होता है, तो उसकी पूरी वित्तीय जिम्मेदारी बैंक की होगी.

आम जनता पर क्या होगा असर?
आम उपभोक्ताओं के लिए भुगतान की प्रक्रिया थोड़ी लंबी हो सकती है, लेकिन यह उनके पैसे को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है. छोटे और नियमित भुगतानों (जैसे UPI Lite) के लिए नियमों में कुछ लचीलापन दिया जा सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए 1 अक्टूबर 2026 से कड़े नियम लागू होंगे.

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