मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर दोहराया है कि भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत और वैश्विक मुद्रा के रूप में स्थापित करने का उसका दीर्घकालिक रोडमैप पूरी तरह बरकरार है. हाल ही में मुद्रा बाजार में देखी गई अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए सख्त कदमों को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाते हुए RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने स्पष्ट किया कि ये उपाय केवल एक “अस्थायी स्थिति” से निपटने के लिए थे.
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रबी शंकर ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों में बाजार में जो पाबंदियां देखी गईं, उनका उद्देश्य बाजार के स्वाभाविक प्रवाह को रोकना नहीं, बल्कि अत्यधिक सट्टेबाजी और डॉलर की कृत्रिम कमी को रोकना था.
सट्टेबाजी पर लगाम और अंतर्राष्ट्रीयकरण पर जोर
रबी शंकर ने जोर देकर कहा कि RBI का दूरदर्शी लक्ष्य यह है कि दुनिया के किसी भी कोने में बैठा कोई भी उपयोगकर्ता, जिसका रुपये से वास्ता है, वह उन सभी वित्तीय उत्पादों का उपयोग कर सके जो भारतीय बाजार में उपलब्ध हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि 30 मार्च और 1 अप्रैल को लागू किए गए प्रतिबंध, जिसमें नेट ओपन पोजीशन (NOP) पर 100 मिलियन डॉलर की सीमा शामिल थी, केवल बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए थे.
हालांकि, उन्होंने इन प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी, लेकिन यह जरूर कहा कि जैसे-जैसे बाजार की स्थिति सामान्य होगी, इन उपायों की समीक्षा की जाएगी.
बाजार की स्थिरता प्राथमिकता
जब डिप्टी गवर्नर से पूछा गया कि क्या भविष्य में भी ऐसे कड़े कदम उठाए जा सकते हैं, तो उन्होंने व्यवहारिक उत्तर देते हुए कहा, “RBI केवल तभी हस्तक्षेप करता है जब बाजार में अत्यधिक अस्थिरता या व्यवधान की स्थिति हो.” उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च 2026 में की गई कार्रवाई रुपये के मूल्य गिरने या बढ़ने के कारण नहीं, बल्कि बाजार में व्याप्त अनिश्चितता और सट्टेबाजी के कारण थी.
भविष्य में रुपये की वैल्यू के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से बाजार की शक्तियों (मांग और आपूर्ति) पर निर्भर करेगा. केंद्रीय बैंक की भूमिका केवल यह सुनिश्चित करना है कि देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजार सुचारू रूप से कार्य करते रहें.
संकट काल के लिए तैयार है RBI
मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक बाजार के दबावों का जिक्र करते हुए रबी शंकर ने निवेशकों को आश्वस्त किया. उन्होंने याद दिलाया कि जिस तरह RBI ने कोविड-19 महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सक्रियता दिखाई थी, भविष्य में भी जरूरत पड़ने पर बाजार को स्थिर करने के लिए वैसे ही साहसिक फैसले लिए जाएंगे.
राहत के शुरुआती संकेतों के रूप में, इस सप्ताह की शुरुआत में RBI ने अपने 1 अप्रैल के आदेश में ढील देते हुए अधिकृत डीलरों को कुछ डेरिवेटिव अनुबंधों (NDDCs) को फिर से शुरू करने की अनुमति दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक का बाजार पर नियंत्रण मजबूत है और वह धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है.


