रांची: बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 3rd International Conference on Computational Intelligence (ICCI) 2026 का आयोजन शुरू हुआ। सम्मेलन के शुरुआती सत्र में देश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के मौजूदा और संभावित उपयोगों पर चर्चा की।
जियोस्पेशियल डेटा और मशीन लर्निंग के मेल पर जोर
सम्मेलन के कन्वीनर डॉ. सुदीप कुमार साहाना ने कार्यक्रम के विषय और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने वास्तविक दुनिया की समस्याओं को तकनीक के जरिए हल करने में जियोस्पेशियल डेटा और मशीन लर्निंग को एक साथ इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. अभिजीत मुस्तफी ने झारखंड में जियोस्पेशियल क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने सरकारी स्तर पर हो रही पहलों तथा जियोस्पेशियल डेटा के विश्लेषण में मशीन लर्निंग की बढ़ती उपयोगिता को भी रेखांकित किया।
AI के वैज्ञानिक इस्तेमाल पर भी चर्चा
BIT मेसरा के Dean of Faculty Affairs (DoFA) प्रो. अशोक शेरॉन ने संस्थान में चल रहे शैक्षणिक और शोध कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने प्रोटीन सीक्वेंस के विश्लेषण समेत विज्ञान के अलग-अलग क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने AI और मशीन लर्निंग के विभिन्न क्षेत्रों में इस्तेमाल से जुड़े नए शोध और तकनीकी पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया।
उद्योग और सतत विकास में AI की भूमिका
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीपक जैन, Executive Director (Digital Transformation), SAIL Digital Transformation Division, Ranchi ने AI को केवल सैद्धांतिक तकनीक के तौर पर देखने के बजाय इसके व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने उद्योग जगत के साथ-साथ सतत विकास के क्षेत्र में AI आधारित तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं को लेकर अपने विचार रखे।
जिम्मेदार AI विकास की जरूरत
ISI Kolkata के प्रोफेसर और मुख्य अतिथि प्रो. उत्पल गारैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने AI तकनीक के विकास में जवाबदेही और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार AI की बढ़ती क्षमताओं के साथ इसके इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों और जिम्मेदारियों पर भी गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
सम्मेलन के आयोजन में शोधार्थियों और छात्रों की भागीदारी
ICCI 2026 के कन्वीनर डॉ. सुदीप कुमार साहाना और डॉ. देबजानी मुस्तफी हैं। वहीं डॉ. संदीप दत्ता और डॉ. शमामा अनवर को-कन्वीनर की भूमिका में हैं।
कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. देबजानी मुस्तफी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. पूनम मोरल, डॉ. कोमल नाज, डॉ. लोपामुद्रा होता, डॉ. रतिंद्रनाथ दत्ता, डॉ. संदीप घोषाल और डॉ. अदिति पांडा समेत आयोजन समिति के अन्य सदस्यों का योगदान रहा।
BIT मेसरा के शोधार्थियों, एमटेक और बीटेक विद्यार्थियों ने भी आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं और समन्वय कार्यों में भाग लिया।
आगे तकनीकी विषयों पर होंगे सत्र
सम्मेलन के आगामी सत्रों में कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस से जुड़े अलग-अलग विषयों पर तकनीकी और अकादमिक चर्चा जारी रहेगी। इनमें AI, मशीन लर्निंग, जियोस्पेशियल तकनीक और इनके विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोगों से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं।
