Friday, July 3, 2026

PM Modi की मां के अपमान पर NDA का बढ़ा आक्रोश – 4 सितंबर को 5 घंटे के लिए बंद रहेगा बिहार

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एनडीए ने ‘मां की गाली’ विवाद को लेकर 4 सितंबर को बिहार बंद का ऐलान किया है. सुबह 7 से दोपहर 12 बजे तक होने वाले इस बंद की अगुवाई महिला मोर्चा करेगी और आपात सेवाओं व रेल परिचालन को इससे अलग रखा गया है.

बिहार की राजनीति में ‘मां की गाली’ विवाद लगातार तूल पकड़ रहा है. इसी मुद्दे को लेकर एनडीए ने 4 सितंबर को सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिहार बंद का आह्वान किया है. एनडीए ने साफ किया है कि आपातकालीन सेवाएं और रेल परिचालन इस बंद से प्रभावित नहीं होंगे ताकि आम लोगों को असुविधा न हो. बंद को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने की अपील की गई है.

मां के अपमान पर NDA का आक्रोश

दरभंगा में कांग्रेस और आरजेडी के मंच से एक मां के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर एनडीए ने कड़ा विरोध जताया है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि मां भगवान का स्वरूप होती हैं और ऐसे मंच से उनका अपमान पूरे बिहार को शर्मसार करता है. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक किसी ने खेद तक नहीं जताया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.

महिला मोर्चा की जिम्मेदारी

इस बंद को खास बनाने के लिए बीजेपी महिला मोर्चा और एनडीए की महिला इकाइयां मोर्चा संभालेंगी. जायसवाल ने कहा कि मां-बहनों का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और महिलाएं इस बंद को सफल बनाएंगी. उनका दावा है कि यह बंद महिलाओं के सम्मान की लड़ाई का प्रतीक बनेगा.

जेडीयू और अन्य दलों का समर्थन

जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन के नेताओं ने जिस तरह खुले मंच से एक मां का अपमान किया है, वह लोकतंत्र पर धब्बा है. उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाएं इसका जवाब जरूर देंगी. बंद के दौरान यातायात बाधित नहीं होगा और यह शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा.

एनडीए के घटक दलों के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि गाली-गलौज उनकी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा रही है. राजू तिवारी ने कहा कि इस घटना से उनकी सोच फिर उजागर हो गई है.

एनडीए की एकजुटता का संदेश

एनडीए ने साफ किया है कि इसके सभी घटक दल इस बंद का समर्थन करेंगे और इसे सफल बनाने में जुटे हैं. महिला मोर्चा की अगुवाई में होने वाला यह बंद, बिहार की राजनीति में न केवल विपक्ष पर सीधा हमला है बल्कि एनडीए की एकजुटता और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर उसकी आक्रामक रणनीति का भी संकेत है.

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