Saturday, October 31, 2026

PM मोदी बोले- नक्सलवाद के बाद अब ‘दिमागी नक्सलवाद’ से सतर्क रहने की जरूरत

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एकता नगर (गुजरात) | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ मिली सफलता के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की विचारधारा से देश को सावधान रहना चाहिए।

प्रधानमंत्री शनिवार को गुजरात के एकता नगर स्थित परेड ग्राउंड में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय एकता, देश की सुरक्षा, घुसपैठ, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और विकसित भारत के लक्ष्य जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।

विपक्ष को बताया ‘अवरोध पक्ष’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष अब ‘विरोध पक्ष’ के बजाय ‘अवरोध पक्ष’ बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष कई मुद्दों पर देश को एकजुट करने के बजाय लोगों को बांटने का काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने विदेशों में होने वाली कुछ राजनीतिक मुलाकातों को लेकर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी की विदेश यात्राओं की ओर परोक्ष संकेत करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में कौन किससे मिल रहा है और भारत विरोधी ताकतें किसे समर्थन दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि देश को ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और राष्ट्रीय हितों के मुद्दे पर एकजुट रहना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर अफवाहों को लेकर जताई चिंता

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका उपयोग अफवाहें फैलाने और देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए नागरिकों को भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहना चाहिए। उनके अनुसार, देश को बांटने वाली गतिविधियों का मिलकर मुकाबला करना आवश्यक है।

‘नक्सलवाद के खिलाफ किया गया संकल्प पूरा’

मोदी ने कहा कि उन्होंने पिछले वर्ष संकल्प लिया था कि जब तक देश नक्सलवाद और माओवाद से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक सरकार चैन से नहीं बैठेगी। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस दिशा में अपना वादा पूरा किया है।

हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी ‘दिमागी नक्सलियों’ के खतरे के प्रति सतर्क रहना होगा। यह शब्द प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन में इस्तेमाल किया।

सीमाओं की सुरक्षा और घुसपैठ रोकने पर जोर

प्रधानमंत्री ने देश के सामने भविष्य की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित करना, घुसपैठ रोकना और जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने पंथनिरपेक्ष नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ और ‘विकसित भारत’ देश के दो प्रमुख लक्ष्य हैं।

सरदार पटेल के योगदान को किया याद

राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 550 से अधिक रियासतों को एकजुट कर पटेल ने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत आधार दिया।

मोदी ने कहा कि सरदार पटेल ने केवल देश के भौगोलिक स्वरूप को जोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से भी एकता के सूत्र में बांधा।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय एकता दिवस को देश में राष्ट्रीय पर्वों के रूप में उत्साह से मनाया जाता है।

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का भी किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण के माध्यम से देश के सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में भी पहल की थी।

मोदी के अनुसार, इस ऐतिहासिक कार्य के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। उन्होंने सोमनाथ मंदिर की ध्वजा को देश के स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।

शाम को आयोजित हुआ राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह

प्रधानमंत्री ने बताया कि इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस का मुख्य कार्यक्रम सुबह के बजाय शाम को आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि सुबह लाखों नागरिकों ने ‘रन फॉर यूनिटी’ में हिस्सा लेकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं दीं और सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को नमन किया।

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