Friday, October 23, 2026

Ola-Uber को 30 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम, नियम नहीं माने तो लाइसेंस रद्द.

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पटना | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

बिहार में कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर परिवहन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। यात्रियों की सुरक्षा, चालकों की समस्याओं के समाधान और किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ओला, ऊबर, रैपिडो और सवारी मिथिला जैसी एग्रीगेटर कंपनियों को निर्धारित नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

परिवहन विभाग ने ओला और ऊबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर 30 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा है। विभाग ने कंपनियों को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के साथ अपनी सेवाओं में जरूरी सुधार करने को कहा है।

एक सप्ताह में एंबुलेंस सेवा पर भी देनी होगी रिपोर्ट

परिवहन विभाग कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं के साथ एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के माध्यम से एंबुलेंस सेवा का विस्तार करने की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके लिए संबंधित कंपनियों को एक सप्ताह के भीतर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है।

परिवहन सचिव राज कुमार ने शुक्रवार को कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक में यात्रियों और चालकों की सुविधा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई।

हालांकि, एंबुलेंस सेवा के विस्तार की अंतिम तारीख, उपलब्ध वाहनों की संख्या और बुकिंग की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

हिंदी और अंग्रेजी में चैटबॉट की सुविधा अनिवार्य

नए निर्देशों के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियों को अपने मोबाइल ऐप पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में चैटबॉट की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।

इसका उद्देश्य उन यात्रियों और चालकों को सहायता देना है, जिन्हें अंग्रेजी में जानकारी प्राप्त करने में परेशानी होती है। दोनों भाषाओं में सहायता मिलने से ऐप इस्तेमाल करने, शिकायत दर्ज करने और जरूरी जानकारी प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है।

इसके अलावा, चालकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए कॉल सपोर्ट की व्यवस्था करने और बिहार में स्थानीय कार्यालय स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया है।

कैंसिलेशन चार्ज और नाइट चार्ज की जानकारी देनी होगी स्पष्ट

परिवहन विभाग ने राइड कैंसिल करने पर लगने वाले शुल्क और रात के समय वसूले जाने वाले अतिरिक्त किराये को लेकर भी पारदर्शिता पर जोर दिया है।

कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि यात्रियों को संबंधित शुल्क की स्पष्ट जानकारी दी जाए और निर्धारित नियमों के अनुसार ही राशि ली जाए। इससे यात्रियों को बुकिंग के समय संभावित खर्च समझने में मदद मिल सकती है।

इसके साथ ही, ऐप या संबंधित सिस्टम पर प्रसारित होने वाले संदेशों की अवधि दो सेकेंड से बढ़ाकर 10 सेकेंड करने का निर्देश दिया गया है, ताकि यात्रियों और चालकों को सूचना पढ़ने और समझने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

निजी वाहनों को जोड़ने पर नियमों का पालन जरूरी

परिवहन विभाग के निर्देशों के मुताबिक, एग्रीगेटर कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म से केवल निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यावसायिक वाहनों को ही जोड़ सकेंगी।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहन संबंधित नियमों के अनुरूप हों। वाहन और दस्तावेजों की पात्रता को लेकर कंपनियों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

चालकों की आईडी निलंबित करने के लिए भी कंपनियों को मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करनी होगी। इस प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी होगा, ताकि किसी चालक के खिलाफ कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार की जाए।

एयरपोर्ट पर वाहनों की पार्किंग की भी व्यवस्था

परिवहन विभाग ने हवाई अड्डे पर एग्रीगेटर कंपनियों के वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिया है। इसका उद्देश्य कैब सेवाओं के संचालन को व्यवस्थित करना और यात्रियों को वाहन लेने में होने वाली परेशानियों को कम करना है।

राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन के अनुसार, कंपनियों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी और निर्देशों के अनुपालन का सत्यापन भी होगा।

30 अक्टूबर तक रिपोर्ट, नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई संभव

ओला और ऊबर को जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अब कंपनियों को 30 अक्टूबर तक विभाग को अपनी अनुपालन रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने समेत अन्य कार्रवाई की संभावना जताई गई है।

इन निर्देशों का उद्देश्य बिहार में कैब और बाइक टैक्सी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। अब यह देखना होगा कि संबंधित कंपनियां निर्धारित समय-सीमा में जरूरी बदलाव करती हैं या नहीं।

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