रांची: MMDR यानी खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन कानून को लेकर झारखंड में सियासी विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार पर कानून का विरोध करने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रुख अवैध खनन और कोयला चोरी पर प्रभावी रोक के बजाय ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाला है।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि MMDR में किए गए बदलाव खनन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से हैं। उनके मुताबिक इसका संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी है और इससे झारखंड में निवेश तथा रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
विपक्ष के विरोध पर भी साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने झामुमो, कांग्रेस और राजद नेताओं की ओर से MMDR संशोधन के विरोध पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे जनता को भ्रमित करने की कोशिश बताया।
उनका कहना था कि झारखंड खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यदि उद्योगों के लिए स्थिर और स्पष्ट व्यवस्था बनेगी तो निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और दूसरे राज्यों की ओर पलायन कम होने की संभावना भी उन्होंने जताई।
टैक्स और सेस व्यवस्था पर क्या कहा?
अन्नपूर्णा देवी के अनुसार संशोधित कानून का एक उद्देश्य खनन क्षेत्र से जुड़ी कर व्यवस्था में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। उन्होंने दावा किया कि पहले नीलामी के बाद अलग-अलग स्तर पर टैक्स और सेस लगाए जाने से कारोबारियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने कहा कि नए प्रावधानों से देशभर में एक समान व्यवस्था बनाने की कोशिश की गई है। उनके मुताबिक इससे कारोबारियों के लिए नियमों को समझना और कानूनी तरीके से काम करना आसान हो सकता है।
विकसित झारखंड से जोड़ा कानून
केंद्रीय मंत्री ने MMDR संशोधन को विकसित भारत की योजना से जोड़ते हुए कहा कि खनिज संसाधनों का बेहतर और वैधानिक इस्तेमाल आर्थिक विकास में भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि स्पष्ट नियमों के कारण लालफीताशाही कम करने और खनन क्षेत्र में वैध कारोबार को सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
कई राज्यों का उदाहरण दिया
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि MMDR से जुड़े प्रावधान केवल झारखंड तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और केरल समेत कई राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इस व्यवस्था को लागू किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि इनमें कुछ कांग्रेस शासित राज्य भी शामिल हैं और वहां इस कानून को लेकर झारखंड जैसी राजनीतिक स्थिति नही
