घरेलू कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India Ltd ने जानकारी दी है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में बेहतरीन प्रोडक्शन दर्ज करते हुए 23.4 लाख पैसेंजर कारों का उत्पादन किया है. यह उत्पादन कंपनी का अब तक का सबसे ज़्यादा सालाना प्रोडक्शन है.
इस प्रोडक्शन नंबर के साथ ही, कंपनी भारत में अकेली ऐसी पैसेंजर गाड़ी बनाने वाली कंपनी बन गई है, जिसने एक ही वित्त वर्ष में प्रोडक्शन का यह आंकड़ा पार किया है. यह Suzuki Motor Corporation के तहत दुनिया भर में किसी भी प्लांट द्वारा हासिल किया गया, अब तक का सबसे ज़्यादा सालाना प्रोडक्शन भी है.
Maruti Dzire, Fronx, Swift और कारों ने बढ़ाया उत्पादन
बीते वित्त वर्ष में Maruti Suzuki के लाइनअप में मौजूद Maruti Dzire, Fronx, Swift, Ertiga और Baleno ऐसी कारें रहीं, जिनका उत्पादन सबसे ज्यादा किया गया. इनमें से हर एक ने 2 लाख यूनिट्स के प्रोडक्शन का माइलस्टोन पार कर लिया.

इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए, मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO हिसाशी ताकेउची ने कहा कि, “यह माइलस्टोन एक ही देश के भीतर हासिल किए गए मैन्युफैक्चरिंग के पैमाने को दिखाता है, एक ऐसी उपलब्धि जो दुनिया भर के बहुत कम ऑटोमेकर्स के पास है.”
ताकेउची ने इस नतीजे का श्रेय दशकों में तैयार हुए एक लंबे समय से स्थापित इकोसिस्टम को दिया, जिसे कर्मचारियों, सप्लायर्स और डीलर्स के आपसी सहयोग का समर्थन मिला. ताकेउची ने यह भी बताया कि GST 2.0 जैसे नीतिगत उपायों ने इस दौरान मांग में स्थिरता बनाए रखने में योगदान दिया.
उत्पादन क्षमता को बढ़ाने की योजना बना रही Maruti Suzuki
मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी की बात करें तो इस मौजूदा समय में Maruti Suzuki के चार मैन्युफैक्चरिंग प्लांट चल रहे हैं, जोकि हरियाणा के गुरुग्राम, मानेसर और खरखौदा, और गुजरात के हंसलपुर में स्थित हैं. इन सभी प्लांट की कुल सालाना प्रोडक्शन क्षमता 24 लाख यूनिट है.

लेकिन अपनी विस्तार योजनाओं के तहत, Maruti Suzuki ने मार्च 2026 में गुजरात के सानंद स्थित खोरज इंडस्ट्रियल एस्टेट में अपनी पांचवीं मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए ज़मीन की पहचान कर ली है. इस यूनिट के पूरी तरह से चालू हो जाने के बाद, इससे सालाना 10 लाख यूनिट तक की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना है.
जानकारी के अनुसार Maruti Suzuki ने कुल उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर लगभग 40 लाख यूनिट प्रति वर्ष तक पहुंचाने का एक दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे निर्यात पर बढ़ते ज़ोर और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश से समर्थन मिलेगा.


