रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर सामने आए कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने राज्य सरकार से पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने अभ्यर्थियों के बीच विश्वास का संकट पैदा किया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ABVP के अनुसार, भर्ती परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मामलों में कथित गड़बड़ियों, OMR शीट से संबंधित आरोपों, निजी एजेंसियों की भूमिका और अधिकारियों पर हुई कार्रवाई ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। परिषद का दावा है कि इन घटनाओं से विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के हजारों अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा है।
परिषद की प्रमुख मांगें
संगठन ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं—
- JPSC और JSSC की विवादित भर्ती प्रक्रियाओं की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- मामले की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित कर दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- चयन प्रक्रिया में कथित रूप से प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएं।
- भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों, कर्मचारियों, निजी एजेंसियों तथा अन्य संबंधित पक्षों की निष्पक्ष जांच हो।
- भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल ऑडिट आधारित परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।
- उच्च शिक्षा से जुड़े कुछ शैक्षणिक प्रावधानों की समीक्षा कर पूर्व व्यवस्था बहाल करने पर भी विचार किया जाए।
- संगठन ने नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस्तीफा देने की भी मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
ABVP के प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य झारखंड के युवाओं के हितों की रक्षा करना है। उनका कहना है कि यदि मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो परिषद राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन चलाएगी।
जनजागरण अभियान की तैयारी
परिषद ने बताया कि आगामी दिनों में हस्ताक्षर अभियान, धरना, प्रदर्शन, जनजागरण कार्यक्रम और अन्य शांतिपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से अभ्यर्थियों की आवाज को उठाया जाएगा। संगठन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने तक उसका अभियान जारी रहेगा।
