रांची, 9 अक्टूबर 2026: झारखंड में 211 अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन का मामला फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राज्य सरकार को निर्णय लेने के लिए दी गई दो महीने की समयसीमा 4 अक्टूबर को समाप्त हो गई, लेकिन शिक्षकों के अनुसार अब तक इस संबंध में कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। इससे नाराज शिक्षक एक बार फिर अदालत का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं।
शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनके समायोजन और नियमितीकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि अदालत के निर्देश के बाद भी निर्णय में देरी से उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था निर्देश
मामले के अनुसार, 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका (सिविल) संख्या 132/2016 में झारखंड सरकार को 211 अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन पर दो महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
इस अवधि की समयसीमा 4 अक्टूबर को पूरी हो गई। हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इस कारण आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
JTET की अनिवार्यता पर भी विवाद
विशेष शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि समायोजन के मामले में भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) से मान्यता प्राप्त निर्धारित व्यावसायिक योग्यता को आधार बनाया जाए।
शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति और योग्यता से जुड़े मामले में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) की अनिवार्यता को आधार बनाकर निर्णय में देरी नहीं होनी चाहिए। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने से समायोजन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
211 शिक्षकों को फैसले का इंतजार
राज्य में वर्षों से अनुबंध पर काम कर रहे 211 विशेष शिक्षक अपने समायोजन को लेकर सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शिक्षकों के मुताबिक, लंबे समय तक सेवा देने के बाद भी भविष्य को लेकर स्पष्टता नहीं होने से उन्हें आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस अनिश्चितता का असर उनके परिवारों पर भी पड़ रहा है।
फैसला नहीं आया तो फिर अदालत जाएंगे शिक्षक
विशेष शिक्षकों ने राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए जल्द निर्णय लेने और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। जरूरत पड़ने पर अदालत के आदेश के अनुपालन में देरी को लेकर अवमानना याचिका दायर करने के विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
फिलहाल, 211 अनुबंधित विशेष शिक्षकों के समायोजन को लेकर सरकार के अगले कदम पर नजर है। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से निर्णय आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
BHARATSUPERFASTNEWS
