Sunday, August 9, 2026

Jamtara News: दुलाडीह में आदिवासी महोत्सव की धूम, लोक संस्कृति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश.

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जामताड़ा: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दुलाडीह स्थित नगर भवन में जिला स्तरीय झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड की पारंपरिक संस्कृति, लोक कला, गीत-संगीत और आदिवासी जीवनशैली की आकर्षक झलक देखने को मिली। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए लोगों को जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

समारोह का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, उपायुक्त आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह और जिला परिषद अध्यक्ष दीपिका बेसरा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

आदिवासी समाज की विरासत को याद करने का दिन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। यह दिन आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, भाषा, परंपराओं, पहचान और अधिकारों को समझने का अवसर देता है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंत्री ने जामताड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिले में मेडिकल कॉलेज की सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर भी सरकार की ओर से प्रयास जारी हैं।

अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहें: उपायुक्त

उपायुक्त आलोक कुमार ने विश्व आदिवासी दिवस पर जिलेवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं, संघर्ष और प्रकृति के साथ जुड़ी जीवनशैली समाज के लिए प्रेरणादायक है।

उन्होंने बिरसा मुंडा समेत अन्य जननायकों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन से साहस, त्याग और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा मिलती है। उपायुक्त ने नई पीढ़ी से अपनी सांस्कृतिक विरासत और पहचान को बनाए रखने की अपील की।

प्रकृति के साथ संतुलन आदिवासी जीवन की खासियत: एसपी

पुलिस अधीक्षक शम्भू कुमार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीता आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संकट, ग्लोबल वार्मिंग और सतत विकास जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया के सामने हैं। ऐसे में आदिवासी समुदाय की प्रकृति संरक्षण से जुड़ी परंपराएं महत्वपूर्ण सीख देती हैं।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

महोत्सव में विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों और स्थानीय कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और अन्य प्रस्तुतियों के जरिए झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा गया।

कई प्रस्तुतियों में पर्यावरण संरक्षण और जल, जंगल व जमीन की रक्षा का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों और कलाकारों के प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।

सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए लगाए गए स्टॉल

महोत्सव परिसर में कृषि, मत्स्य, समाज कल्याण, जेएसएलपीएस और वन विभाग समेत कई विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों, स्थानीय उत्पादों और विभागीय सुविधाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान पांच सामुदायिक वन पट्टों का भी वितरण किया गया। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों तथा आकर्षक और प्रभावी स्टॉल लगाने वाले विभागीय कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में वन प्रमंडल पदाधिकारी राहुल कुमार, जिला परिषद अध्यक्ष दीपिका बेसरा, उप विकास आयुक्त असीम किस्पोट्टा, आईटीडीए के परियोजना निदेशक जुगनू मिंज, अपर समाहर्ता पूनम कच्छप और अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

इसके अलावा जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, मुखिया, झारखंड आंदोलनकारी, स्कूली विद्यार्थी और स्थानीय लोग भी महोत्सव में शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान झारखंड की आदिवासी संस्कृति और परंपरा की रंगीन छटा देखने को मिली।

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