Tuesday, August 25, 2026

JAC में लंबे समय से खाली हैं अहम पद, उपाध्यक्ष समेत 13 सदस्य पद रिक्त; कामकाज पर असर.

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रांची: झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) में लंबे समय से महत्वपूर्ण पद खाली होने के कारण परिषद के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिषद में उपाध्यक्ष का पद जनवरी 2025 से रिक्त है, जबकि कुल 19 सदस्य पदों में से 13 पर फिलहाल नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में केवल छह सदस्य ही कार्यरत हैं।

पदों की इस कमी का असर JAC के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामों पर पड़ने की बात कही जा रही है। संस्थानों की मान्यता, निरीक्षण, विभिन्न समितियों के गठन और दूसरे महत्वपूर्ण निर्णयों से जुड़े काम भी प्रभावित होने की आशंका है।

जनवरी 2025 से खाली है उपाध्यक्ष का पद

JAC के तत्कालीन उपाध्यक्ष विनोद सिंह का तीन साल का कार्यकाल 17 जनवरी 2025 को पूरा हुआ था। इसके बाद से अब तक नए उपाध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है।

उपाध्यक्ष की भूमिका परिषद में कई महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ी होती है। इसलिए लंबे समय से पद खाली रहने के कारण प्रशासनिक फैसलों और विभिन्न प्रक्रियाओं के संचालन पर असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।

दुमका क्षेत्रीय कार्यालय की जिम्मेदारी भी अहम

उपाध्यक्ष को JAC के दुमका स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की जिम्मेदारी भी संभालनी होती है। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता से जुड़े मामलों, निरीक्षण दलों के गठन और विभिन्न समितियों की गतिविधियों में भी उपाध्यक्ष की भूमिका रहती है।

परिषद में बड़ी संख्या में सदस्य पद रिक्त होने का असर बैठकों और निर्णय प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। JAC के कामकाज से जुड़े नियमों में बैठकों के लिए आवश्यक कोरम का प्रावधान है, ऐसे में रिक्तियों की स्थिति महत्वपूर्ण बन जाती है।

19 में सिर्फ 6 सदस्य कार्यरत

JAC में कुल 19 सदस्य पद निर्धारित हैं। इनमें से फिलहाल सिर्फ छह सदस्य कार्यरत बताए जा रहे हैं। यानी 13 पद खाली हैं।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि परिषद जैसी महत्वपूर्ण संस्था में इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त रहने से कामकाज की गति प्रभावित हो सकती है। समितियों के गठन और जरूरी फैसलों में भी देरी की संभावना रहती है।

शिक्षा संगठन ने सरकार से की नियुक्ति की मांग

झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा ने सरकार से JAC में रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है। संगठन के नेता रघुनाथ सिंह का कहना है कि लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों का खाली रहना राज्य की शिक्षा व्यवस्था के हित में नहीं है।

संगठन के मुताबिक, JAC से विद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के कई जरूरी कार्य जुड़े हैं। इसलिए परिषद में पर्याप्त संख्या में पदाधिकारी और सदस्य होना आवश्यक है।

आंदोलन और हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि यदि सरकार ने जल्द नियुक्तियां नहीं कीं तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी की भी बात कही गई है।

JAC राज्य में मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं, परिणामों, संस्थानों की मान्यता और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करता है। ऐसे में उपाध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों पर जल्द फैसला लेने की मांग तेज होती जा रही है।

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