नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत फिलहाल एक कठिन दौर में पहुंचती दिख रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को म्यूनिख लीडर्स बैठक 2026 में कहा कि दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर काफी गहन चर्चा हो चुकी है और अब ऐसी स्थिति है, जहां एक-दूसरे से अतिरिक्त रियायत हासिल करना आसान नहीं होगा।
वित्त मंत्री के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिलहाल एक तरह के स्थिर चरण में है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए आगे बढ़ने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में
सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है। इसी वजह से अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करने पर जोर देता रहा है।
उन्होंने अमेरिकी रुख से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वाशिंगटन भारत के साथ व्यापार में लंबे समय से जमा हुए असंतुलन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है। दोनों देशों के बीच फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे के तहत बातचीत आगे बढ़ाई जा रही है।
अंतरिम समझौते के साथ-साथ भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी चर्चा जारी है। वित्त मंत्री ने कहा कि अभी यह देखना बाकी है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच कितनी गुंजाइश उपलब्ध है।
भारत-EU समझौते को बड़ी उपलब्धि बताया
अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में मुश्किलों के बीच वित्त मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए व्यापार समझौते को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन के उस आकलन का उल्लेख किया, जिसमें इस समझौते को बेहद व्यापक करार दिया गया था।
सीतारमण के अनुसार यह समझौता बड़े आर्थिक बाजारों को जोड़ने वाला कदम है और इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक इससे करीब 2 अरब लोगों की संयुक्त आबादी वाले बाजारों को जोड़ा गया है और संबंधित अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करती हैं।
टैरिफ लाइनों पर भी बनी सहमति
समझौते के तहत भारत ने करीब 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोलने की प्रतिबद्धता जताई है, जो व्यापार मूल्य के लगभग 97 प्रतिशत के बराबर बताई गई है। वहीं यूरोपीय संघ ने करीब 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को भारत के लिए खोलने की बात कही है, जो व्यापार मूल्य के लगभग 99 प्रतिशत को कवर करती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि बाजार खोलने को लेकर भारत का रुख दोनों अर्थव्यवस्थाओं की जरूरत और आपसी पूरकता को ध्यान में रखकर तय किया गया है। सरकार ने घरेलू उद्योग और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर संभावित प्रभावों को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतने की बात कही।
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