Thursday, October 29, 2026

India Power Demand: भारत में बिजली की मांग में रिकॉर्ड उछाल, FY27 का ग्रोथ अनुमान बढ़कर 9%

Share

नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026 | BharatSuperFastNews

भारत में बिजली की बढ़ती खपत को देखते हुए वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए बिजली मांग में वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया है। पहले यह अनुमान 7 प्रतिशत था। रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और बिजली की बढ़ती जरूरत के चलते मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

15 साल में सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी का दावा

जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक बिजली की मांग में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। अक्टूबर 2026 में बिजली उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड के बाद वर्ष 2021 में दर्ज तेजी को छोड़ दें, तो अक्टूबर की यह वृद्धि पिछले 15 वर्षों में किसी एक महीने की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। जेफरीज ने वर्ष 2028 में बिजली की मांग में 6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान भी जताया है।

थर्मल पावर प्लांट पर बढ़ा दबाव

बिजली की बढ़ती जरूरत के कारण ताप विद्युत संयंत्रों का इस्तेमाल भी बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में थर्मल पावर प्लांट की क्षमता उपयोग दर बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 62 प्रतिशत थी।

दूसरी ओर, कोयले के भंडार में कमी चिंता का विषय बनी हुई है। जेफरीज के आंकड़ों के अनुसार, बिजली संयंत्रों के पास फिलहाल करीब छह दिनों का कोयला स्टॉक बचा है। पिछले साल इसी अवधि में यह भंडार लगभग 15 दिनों के लिए पर्याप्त था।

यदि बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो कोयले की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा।

सौर ऊर्जा उत्पादन में 47 प्रतिशत की तेजी

बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका भी बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 17 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हो गई।

इस वृद्धि में सौर ऊर्जा का अहम योगदान रहा। जेफरीज ने सौर बिजली उत्पादन में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान दिया है। हालांकि, कमजोर मानसून के चलते जलविद्युत उत्पादन में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है।

ब्रोकरेज फर्म का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर 52 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

बिजली की कीमतों में भी उछाल

बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच दबाव का असर अल्पकालिक बाजार की कीमतों पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान बिजली की औसत कीमत 46 प्रतिशत बढ़कर 5.7 रुपये प्रति यूनिट हो गई थी। अक्टूबर में यह बढ़कर 7.1 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है।

बताए गए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 2.6 गुना अधिक है। हालांकि, अल्पकालिक बाजार की कीमतें समय, मांग और उपलब्ध आपूर्ति के अनुसार बदल सकती हैं।

आगे क्या रह सकता है असर?

बिजली की मांग में लगातार वृद्धि से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने की जरूरत बढ़ सकती है। जेफरीज के मुताबिक, बढ़ती मांग के बीच नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के आवंटन में तेजी आने की संभावना है।

भारत के ऊर्जा क्षेत्र के सामने चुनौती यह होगी कि बढ़ती औद्योगिक और घरेलू जरूरतों को पूरा करते हुए बिजली की कीमतों और आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखी जाए।

Read more

Local News