पटना: IDBI बैंक की बड़ी हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के प्रस्ताव के खिलाफ बैंक कर्मचारी और अधिकारी विरोध कर रहे हैं। बैंक यूनियनों ने इस फैसले को बैंक का विदेशीकरण बताते हुए केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। विरोध के तहत बिहार में बैंककर्मी 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय हड़ताल करेंगे। इससे राज्य में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
इससे पहले 16 अक्टूबर को बिहार में IDBI बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों ने काली पट्टी तथा काले बैज लगाकर काम किया था। यह प्रदर्शन हिस्सेदारी बिक्री के फैसले के खिलाफ आयोजित किया गया था।
60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर विरोध
केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की ओर से IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने का फैसला बैंक यूनियनों के विरोध का केंद्र है। खबर के अनुसार, इस सौदे का मूल्य लगभग 52,878 करोड़ रुपये बताया गया है।
यूनियनों का कहना है कि बैंक की हिस्सेदारी बेचने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उनका विरोध केवल स्वामित्व में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बैंक पर विदेशी निवेशकों के बढ़ते नियंत्रण और कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर भी चिंतित हैं।
बिहार और झारखंड की 140 शाखाओं पर पड़ सकता है असर
IDBI बैंक का आंचलिक कार्यालय पटना में स्थित है। इसके अंतर्गत बिहार की 80 और झारखंड की 60 शाखाएं आती हैं। इन शाखाओं में लगभग एक हजार अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं।
प्रस्तावित हड़ताल में कर्मचारियों की भागीदारी से शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सेवाओं पर वास्तविक असर कर्मचारियों की भागीदारी और संबंधित शाखाओं की स्थिति पर निर्भर करेगा।
‘यह निजीकरण नहीं, बैंक का विदेशीकरण है’
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने हिस्सेदारी बिक्री पर सवाल उठाते हुए इसे केवल निजीकरण का मामला मानने के बजाय बैंक का विदेशीकरण बताया।
यूनियन के अनुसार, IDBI बैंक ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 5,600 करोड़ रुपये, 7,500 करोड़ रुपये और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। बैंक के मुनाफे का हवाला देते हुए कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाया है कि लाभ कमाने वाले संस्थान की इतनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने की जरूरत क्यों है।
3.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि को लेकर चिंता
AIBOA बिहार के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश ने भी हिस्सेदारी बिक्री के फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुनाफा कमाने वाले बैंक की हिस्सेदारी बेचना उचित नहीं है।
उनके अनुसार, IDBI बैंक में आम लोगों की लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। यूनियनों को आशंका है कि हिस्सेदारी बिक्री के बाद बैंक पर विदेशी निवेशकों का प्रभाव बढ़ सकता है। यह यूनियनों की चिंता और आशंका है; सौदे के बाद नियंत्रण की वास्तविक स्थिति अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगी।
सरकार के पुराने आश्वासन का भी दिया हवाला
AIBOA के महासचिव एस. नागराजन ने बैंक के विलय के समय संसद में दिए गए कथित सरकारी आश्वासन का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, उस समय कहा गया था कि बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम नहीं होगी।
यूनियनों का कहना है कि 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला इस आश्वासन पर सवाल खड़े करता है। उन्हें यह भी चिंता है कि स्वामित्व में बदलाव से कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर बैंक कर्मचारी और अधिकारी 2 व 3 नवंबर को हड़ताल की तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
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