Monday, June 22, 2026

IBJA के अनुसार, फेडरल रिजर्व के कड़े रुख से आज सोना ₹1,47,870 और चांदी ₹2,38,100 के स्तर पर कारोबार कर रही है.

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वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों के बीच आज भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी हलचल देखी गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, आज 22 जून 2026 को देश के अलग-अलग हिस्सों में सोना और चांदी नए स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं. दिल्ली में आज 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,47,870 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,35,548 प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है. वहीं, औद्योगिक मांग और वैश्विक दबाव के बीच चांदी की कीमत आज ₹2,38,100 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है.

फेडरल रिजर्व के रुख से टूटा निवेशकों का भरोसा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक वायदा बाजार में सोने की कीमतों में 1.41% की महत्वपूर्ण गिरावट आई है, जिसके बाद यह ₹1,47,203 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद आ गया. इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व का हालिया नीतिगत फैसला है. फेड ने ब्याज दरों को 3.50% – 3.75% की सीमा पर स्थिर रखा है. हालांकि, फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं के अनुमानों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, नौ नीति निर्माता अभी भी इस साल के भीतर ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं. इसके चलते सितंबर महीने में ब्याज दर बढ़ने की संभावना बढ़कर 70% तक पहुंच गई है. ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद से सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हो गया है. इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता के दूर होने और भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से भी सोने की सुरक्षित मांग प्रभावित हुई है.

प्रमुख शहरों में आज के भाव
IBJA और स्थानीय सर्राफा संघों द्वारा जारी सुबह 11:00 बजे के आंकड़ों के अनुसार, देश के विभिन्न महानगरों में सोना और चांदी की कीमतें इस प्रकार रहीं:

आगे क्या रहेंगे बाजार के आसार?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. यदि डॉलर इंडेक्स में और मजबूती आती है, तो सोने पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, आगामी शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन को देखते हुए घरेलू बाजार में भौतिक सोने की मांग में तेजी आने की उम्मीद है, जो कीमतों को निचले स्तरों पर सहारा दे सकती है. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक घटनाक्रमों और डॉलर की चाल पर करीबी नजर बनाए रखें.

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