Sunday, October 4, 2026

Health Tips: पेट और लिवर को स्वस्थ रखने के लिए थाली में शामिल करें प्रोटीन, फाइबर और मौसमी फल.

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पटना: स्वस्थ रहने के लिए केवल पेट भरना ही काफी नहीं है, बल्कि भोजन में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। यदि रोजाना की थाली में रोटी और चावल की मात्रा अधिक हो, लेकिन प्रोटीन, फाइबर, फल और सब्जियां पर्याप्त न हों, तो इसका असर सेहत पर पड़ सकता है। जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना और शारीरिक गतिविधि कम होना वजन बढ़ने के साथ फैटी लिवर का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

एम्स पटना के गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. उत्पल आनंद ने खानपान और पेट व लिवर से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हुए संतुलित आहार के महत्व को रेखांकित किया। उनके अनुसार, कार्बोहाइड्रेट को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसकी मात्रा उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की जरूरतों के मुताबिक रखनी चाहिए।

रोटी-चावल के साथ प्रोटीन भी जरूरी

रोटी और चावल शरीर को ऊर्जा देते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह भोजन से हटाने की जरूरत नहीं है। हालांकि, भोजन में केवल इन्हीं की अधिकता होने से दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी रह सकती है।

थाली में दाल, दूध, दही, सत्तू, सोयाबीन, पनीर या अंडे जैसे प्रोटीन स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। इसके साथ हरी सब्जियां, सलाद और साबुत अनाज भी भोजन का हिस्सा होने चाहिए।

जरूरत से अधिक कैलोरी लेने और नियमित शारीरिक गतिविधि नहीं करने से वजन बढ़ सकता है। मोटापा और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां फैटी लिवर के खतरे को बढ़ाती हैं। इसलिए संतुलित भोजन के साथ नियमित व्यायाम पर भी ध्यान देना चाहिए।

दिनभर के भोजन में रखें विविधता

सुबह के नाश्ते में दूध, दलिया, सत्तू या अंडा जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं। दोपहर और रात के खाने में रोटी या चावल के साथ दाल, मौसमी सब्जियां, दही और सलाद शामिल करना उपयोगी है।

अमरूद, पपीता, संतरा, सेब और दूसरे मौसमी फल भी आहार में जगह पा सकते हैं। अलग-अलग प्रकार के फल और सब्जियां खाने से शरीर को विविध पोषक तत्व मिलते हैं। भोजन की मात्रा व्यक्ति की उम्र, गतिविधि और स्वास्थ्य की जरूरतों के अनुसार तय होनी चाहिए।

फैटी लिवर के शुरुआती संकेतों को समझें

फैटी लिवर की स्थिति में लिवर में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। शुरुआती दौर में अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ लोगों को थकान या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता महसूस हो सकती है।

मोटापा, मधुमेह और रक्त में ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ना इसके जोखिम से जुड़े कारक हैं। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर की पुष्टि नहीं की जा सकती।

गैस और एसिडिटी से राहत के लिए बदलें आदतें

बार-बार गैस, पेट फूलने या एसिडिटी की परेशानी होने पर खानपान की आदतों पर ध्यान देना चाहिए। भोजन धीरे-धीरे चबाकर खाएं और एक बार में बहुत अधिक खाने से बचें। रात का खाना सोने से कुछ घंटे पहले करना भी मददगार हो सकता है।

हर व्यक्ति में परेशानी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ अलग हो सकते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि किन चीजों के सेवन से समस्या बढ़ती है। बार-बार एसिडिटी होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दवा लेने से बचें।

यदि परेशानी लगातार बनी रहे, निगलने में कठिनाई हो या उल्टी में खून दिखाई दे, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें।

कब्ज से बचने के लिए फाइबर और पानी पर दें ध्यान

कब्ज की समस्या में दालें, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और साबुत फल उपयोगी हो सकते हैं। पर्याप्त पानी पीना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना भी जरूरी है।

फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाएं, क्योंकि अचानक इसकी मात्रा बढ़ाने से कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने की शिकायत हो सकती है। यदि कब्ज लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ तेज पेट दर्द, उल्टी अथवा मल में खून आने जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस से बचाव जरूरी

हेपेटाइटिस के अलग-अलग प्रकारों के फैलने के तरीके भी अलग होते हैं। कुछ संक्रमण दूषित भोजन और पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी और सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त या अन्य निर्धारित संपर्क माध्यमों से फैल सकते हैं। सुरक्षित पानी, स्वच्छ भोजन, संक्रमित सुइयों से बचाव और उपयुक्त टीकाकरण महत्वपूर्ण हैं।

लिवर सिरोसिस में लंबे समय तक लिवर को नुकसान पहुंचने के कारण उसमें स्थायी निशान बन सकते हैं। इसके पीछे पुरानी लिवर बीमारी सहित कई कारण हो सकते हैं। समय पर जांच और उपचार से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हर पेट दर्द में सर्जरी की जरूरत नहीं

पेट दर्द के पीछे गैस, एसिडिटी, संक्रमण, अल्सर, पथरी या आंतों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। उपचार का निर्णय लक्षणों, चिकित्सकीय जांच और जरूरत के अनुसार की जाने वाली जांचों के आधार पर लिया जाता है। हर मामले में एंडोस्कोपी या सर्जरी जरूरी नहीं होती।

हालांकि, अचानक तेज पेट दर्द, पेट का असामान्य रूप से कड़ा होना, लगातार उल्टी या मल और गैस का बंद हो जाना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

स्वस्थ थाली के लिए अपनाएं ये आदतें

  • प्रोटीन: दाल, दूध, दही, सत्तू, सोयाबीन, पनीर और अंडा।
  • फाइबर: हरी सब्जियां, सलाद, साबुत अनाज और दालें।
  • फल: अमरूद, पपीता, संतरा, सेब और मौसमी फल।
  • सीमित सेवन: जरूरत से ज्यादा मीठे पेय, मिठाइयां और तला-भुना भोजन।
  • बेहतर दिनचर्या: नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन।

पेट और लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाना बेहतर है। यदि पहले से कोई बीमारी है, तो आहार में बड़े बदलाव करने से पहले चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।

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