Saturday, October 31, 2026

GLA कॉलेज की जमीन पर गर्ल्स हॉस्टल बनाने की तैयारी, 200 से अधिक पेड़ काटने को लेकर विवाद

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पलामू | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News

पलामू के गणेश लाल अग्रवाल (GLA) कॉलेज की जमीन पर गर्ल्स हॉस्टल बनाने की योजना को लेकर पेड़ों की कटाई का मामला विवादों में आ गया है। प्रधानमंत्री उच्च शिक्षा अभियान (PM-USHA) के तहत स्वीकृत 10 करोड़ रुपये की राशि से हॉस्टल का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए कॉलेज परिसर की जमीन पर मौजूद पेड़ों को हटाने की जरूरत बताई जा रही है। हालांकि, पेड़ों की वास्तविक संख्या को लेकर वन विभाग की रिपोर्ट और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर सामने आया है।

PM-USHA के तहत मिली है 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति

नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सुविधाओं और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उच्च शिक्षा अभियान (PM-USHA) संचालित किया जा रहा है। इसी योजना के अंतर्गत पलामू में Gender Inclusion & Equality Initiatives के तहत 10 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। योजना को कैबिनेट से प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

इस राशि से GLA कॉलेज की जमीन पर छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने का निर्णय लिया गया है। झारखंड भवन निर्माण निगम ने इसके लिए 9.96 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया है, जिसे तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है।

प्रस्तावित निर्माण स्थल पर लगे हैं पेड़

हॉस्टल के लिए जिस जमीन का चयन किया गया है, वहां बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद हैं। निर्माण कार्य के लिए पेड़ों को हटाने की आवश्यकता को देखते हुए कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य ने वन विभाग से कटाई की अनुमति मांगी थी।

कॉलेज के अनुरोध पर वन विभाग के रेंजर ने स्थल का निरीक्षण किया और अपनी रिपोर्ट वन प्रमंडल पदाधिकारी को सौंपी।

वन विभाग की रिपोर्ट में 118 पेड़ों का उल्लेख

रेंजर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित निर्माण स्थल पर कुल 118 पेड़ हैं। इनमें 117 यूकलिप्टस और एक सागवान का पेड़ शामिल है। रिपोर्ट में पेड़ों की मोटाई 60 से 260 सेंटीमीटर तक बताई गई है।

इसी रिपोर्ट के आधार पर पेड़ों की कटाई की अनुमति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, 31 अक्टूबर 2026 तक पेड़ों को काटने की अनुमति मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है।

स्थानीय लोगों ने पेड़ों की संख्या पर उठाए सवाल

स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रस्तावित निर्माण स्थल पर 200 से अधिक पेड़ मौजूद हैं। उनका कहना है कि वहां यूकलिप्टस के अलावा शीशम, सागवान और अन्य प्रजातियों के पेड़ भी हैं। स्थानीय लोगों ने वन विभाग की रिपोर्ट में पेड़ों की संख्या कम दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए हैं।

उनका यह भी कहना है कि परिसर में वन विभाग की ओर से लगाए गए पेड़ भी मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए घेरा बनाया गया है। इसी मुद्दे को लेकर हॉस्टल निर्माण की योजना का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है।

वन विभाग की मदद के लिए बनाई गई कमेटी

कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने 25 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी कर वन विभाग को सहयोग देने के लिए कमेटी गठित की थी। इसमें डॉ. नीतू कुमारी, एन. नवाज और सुखदेव को शामिल किया गया है।

फिलहाल, हॉस्टल निर्माण की योजना और पेड़ों की कटाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की योजना है, वहीं दूसरी ओर पेड़ों की संख्या और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब इस मामले में वन विभाग की जांच और कटाई की अनुमति से जुड़ी आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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