मिलवॉकी, अमेरिका: जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के समापन दिवस पर भारत ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार में होने वाली विकृतियों और अनुचित प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए कार्रवाई विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप और ठोस प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए।
बैठक में संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता, मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) व्यवस्था, वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी और बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
छिपी सब्सिडी से पैदा होने वाली व्यापारिक विकृतियों पर चिंता
पीयूष गोयल ने कहा कि केवल औद्योगिक क्षमता को व्यापारिक समस्या नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, समस्या उस स्थिति में पैदा हो सकती है जब किसी क्षेत्र में उत्पादन का अत्यधिक भौगोलिक केंद्रीकरण छिपी सब्सिडी या अन्य तरह की सहायता से प्रभावित हो।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से डंपिंग और प्रेडेटरी प्राइसिंग जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इनसे निपटने के लिए WTO के अनुरूप एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी जैसे उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन इनके लिए प्रमाण और कानूनी समीक्षा जरूरी होनी चाहिए।
विकासशील देशों की नीतिगत स्वतंत्रता पर जोर
गोयल ने वैश्विक सप्लाई चेन में विविधता लाने के प्रयासों को उचित बताया, लेकिन कहा कि इसका इस्तेमाल WTO नियमों से बाहर जाकर व्यापारिक कदम उठाने के आधार के रूप में नहीं होना चाहिए।
उन्होंने विकासशील देशों के लिए औद्योगिकीकरण और आर्थिक विकास की नीतियां बनाने की पर्याप्त गुंजाइश बनाए रखने पर जोर दिया। भारत ने WTO में विकासशील देशों के लिए विशेष एवं अलग व्यवहार की व्यवस्था को भी बनाए रखने की बात कही।
MFN व्यवस्था और WTO विवाद निपटान प्रणाली का मुद्दा
केंद्रीय मंत्री ने Most-Favoured-Nation (MFN) सिद्धांत को नियम-आधारित और गैर-भेदभावपूर्ण वैश्विक व्यापार व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया।
उन्होंने WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली को बहाल करने की मांग भी दोहराई। भारत का कहना है कि व्यापारिक विवादों के समाधान के लिए प्रभावी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था जरूरी है।
जबरन मजदूरी से जुड़े सामान पर भारत का रुख
वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि इसे खत्म करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में जबरन मजदूरी प्रतिबंधित है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जुलाई 2026 में अपनी विदेश व्यापार नीति में बदलाव कर जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने का प्रावधान किया है।
हालांकि, गोयल ने जोर दिया कि किसी देश, क्षेत्र या पूरे सेक्टर के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई केवल अनुमान के आधार पर नहीं होनी चाहिए। सीमा पर ऐसे कदमों के लिए विशिष्ट और सत्यापन योग्य प्रमाण तथा उचित प्रक्रिया जरूरी है।
भारत ने नियम आधारित व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया
G20 बैठक में भारत ने पारदर्शी, खुले और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार तंत्र के प्रति अपना समर्थन दोहराया। गोयल ने कहा कि WTO वैश्विक व्यापार व्यवस्था के केंद्र में बना रहना चाहिए और विकासशील देशों को आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त नीतिगत अवसर मिलने चाहिए।
बैठक में व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आए। रिपोर्टों के अनुसार, अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता और जबरन मजदूरी जैसे विषयों पर G20 सदस्यों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बन सकी।
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