Monday, July 6, 2026

EOU की बड़ी कार्रवाई, साइबर ठगों ने लगाया 60 करोड़ का चूना ,रेड में अवैध फोन एक्सचेंज का खुलासा…

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आर्थिक अपराध इकाई ने बिहार के भोजपुर के नारायणपुर गांव में बड़ी कार्रवाई की है और अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है. पढ़ें

पटना: बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक CYBER FRAUD  सिंडिकेट को ध्वस्त करते हुए बड़ी कामयाबी हासिल की है. भोजपुर जिले के नारायणपुर गांव में चौतरफा छापेमारी के दौरान 4 SIM बॉक्स डिवाइस जब्त किए गए और आरोपी मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया गया. यह कार्रवाई दूरसंचार विभाग, भारत सरकार के सहयोग से EOU की साइबर विंग ने की है, जो राज्यभर में चल रहे साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक अभियान का हिस्सा है.

बिहार में EOU का बड़ा एक्शन: EOU के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) नैय्यर हसनैन खान को एक गोपनीय सूचना मिली थी कि भोजपुर के नारायणपुर गांव में SIM बॉक्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी का अड्डा संचालित हो रहा है. इसके बाद साइबर विंग की टीम ने त्वरित कार्रवाई कर गांव में घेराबंदी की और आरोपी मुकेश कुमार को उसके आवास से धर दबोचा. छापेमारी में क्रिप्टो करेंसी लेनदेन के सबूत, बैंक पासबुक और संवेदनशील दस्तावेज भी बरामद हुए.

फर्जी कॉल कर चुराया जा रहा था निजी डाटा: जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने समानांतर टेलीफोन एक्सचेंज संचालित किया था, जिसमें VOIP टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करते हुए कंबोडिया, थाईलैंड और अन्य देशों से आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को लोकल GSM कॉल्स में बदला जाता था.

इसके जरिए रोजाना 10,000 से अधिक फर्जी कॉल कर भारतीय नागरिकों से OTP, बैंक विवरण और निजी डेटा चुराया जाता था. केवल पिछले दो सप्ताह में ही इससे ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जबकि जनवरी 2025 से अब तक 60 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की जा चुकी है.

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: गिरोह के तार यूएई, कंबोडिया, थाईलैंड, चीन, वियतनाम और जर्मनी स्थित साइबर अपराधियों से जुड़े थे. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संचालन होता था. फर्जी सिम कार्ड का जाल झारखंड के पाकुड़ से मार्च 2025 तक 1,000 से अधिक अवैध सिम कार्ड मंगवाए गए.

बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग: इन्हें आयुष्मान भारत कार्ड बनाने के बहाने एकत्र किए गए बायोमेट्रिक डेटा (जैसे फिंगरप्रिंट) से सक्रिय किया जाता था. क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन ठगी से प्राप्त राशि को क्रिप्टो में बदलकर विदेशी सहयोगियों के साथ लेनदेन किया जाता था. EOU को कुछ दिन पहले पकड़े गए हर्षित कुमार (गिरोह का मुखिया) के दो क्रिप्टो एक्सचेंज अकाउंट्स का पता चला है.

बिहार से झारखंड तक फैला नेटवर्क: भोजपुर की कार्रवाई इस सिलसिले की नवीनतम कड़ी है. इससे पहले, 21 जुलाई को EOU ने सुपौल में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मुखिया हर्षित कुमार (21) को गिरफ्तार किया था. हर्षित के पास से 8 SIM बॉक्स, 35 बैंक खातों के दस्तावेज और मोतिहारी में 12-14 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति का पता चला था. वह विदेशों से SIM बॉक्स मंगवाकर पटना, मोतिहारी और झारखंड में नेटवर्क चला रहा था.

क्यों है यह केस चौंकाने वाला?: युवा मास्टरमाइंड 21 वर्षीय हर्षित ने दर्जनों देशों की यात्रा कर अंतरराष्ट्रीय गिरोह खड़ा किया और क्रिप्टो करेंसी के जरिए लेनदेन को गोपनीय बनाया. CSC केंद्र संचालकों और टेलीकॉम वितरकों की मिलीभगत से आम लोगों के बायोमेट्रिक डेटा की चोरी की गई.

EOU का रिकॉर्ड: पिछले दो वर्षों में EOU ने आर्थिक अपराधों और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई कर 357.205 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां चिह्नित की हैं, जिनमें से 51.919 करोड़ की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.

“मुकेश कुमार से गहन पूछताछ जारी है, ताकि उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों तक पहुंचा जा सके. यह मामला कई राज्यों और देशों से जुड़ा है, इसलिए सीबीआई और आईबी की टीमें जल्द पटना पहुंच रही हैं. संपत्ति जब्ती और और गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी रहेगा.”– संजय कुमार,डीआईजी. ईओयू साइबर विंग

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