नई दिल्ली: देश में E20 ईंधन (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर वाहन मालिकों के बीच कई तरह की आशंकाएं बनी हुई हैं। हालांकि, इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (ICT) के कुलपति प्रोफेसर अनिरुद्ध बी. पंडित का कहना है कि E20 ईंधन तकनीकी रूप से सुरक्षित है और इससे देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।
आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों को मिलेगा फायदा
प्रो. पंडित के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से भारत का कच्चे तेल पर आयात निर्भरता कम होगी। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और इथेनॉल की मांग बढ़ने के कारण गन्ना तथा अन्य फसलों के उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना है।
ई20 को लेकर फैली गलतफहमियों पर विशेषज्ञ की राय
उन्होंने कहा कि E20 ईंधन को लेकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही कई आशंकाओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है। उनके मुताबिक, इस नीति को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण, तकनीकी अध्ययन और विशेषज्ञों की समीक्षा की गई है, जिसके बाद ही इसे आगे बढ़ाया गया।
नई गाड़ियां पूरी तरह तैयार, पुराने मॉडलों में सीमित प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में निर्मित अधिकांश नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन किए जा रहे हैं। वहीं, कुछ पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम के रबर या पॉलीमर से बने हिस्सों पर लंबे समय में प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में समय-समय पर वाहन की जांच और आवश्यक पार्ट्स बदलने की सलाह दी जाती है।
इथेनॉल ईंधन का उपयोग नया नहीं
प्रो. पंडित ने बताया कि भारत में इथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग कोई नई अवधारणा नहीं है। उनका कहना है कि पहले भी इथेनॉल आधारित ईंधन पर प्रयोग और उपयोग हो चुके हैं। आधुनिक तकनीक और बेहतर इंजन डिज़ाइन के कारण E20 मिश्रण को अपनाना पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक और सुरक्षित माना जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि E20 ईंधन नीति से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, आयात बिल कम होगा और कृषि क्षेत्र को अतिरिक्त मांग का लाभ मिलेगा। साथ ही, नई पीढ़ी के वाहनों के लिए यह ईंधन बिना किसी बड़ी तकनीकी चुनौती के इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि पुराने वाहनों के लिए समय-समय पर रखरखाव और निरीक्षण पर्याप्त रहेगा।
