Tuesday, November 3, 2026

Diwali Investment: सोना या चांदी, पिछले 10 साल में किसने दिया ज्यादा रिटर्न? जानें ₹50 हजार के निवेश का हिसाब

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Business News | 3 नवंबर 2026: दिवाली पर सोना और चांदी खरीदना भारतीय परिवारों की पुरानी परंपरा रही है। हालांकि, अब इन धातुओं को केवल त्योहार और आभूषणों तक सीमित नहीं देखा जाता, बल्कि कई लोग इन्हें लंबे समय के निवेश का विकल्प भी मानते हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन सवाल यह है कि अगर कोई व्यक्ति पिछले 10 साल से हर दिवाली पर ₹50,000 का निवेश सोने या चांदी में करता, तो आज किसके पास ज्यादा संपत्ति होती?

विशेषज्ञों की ओर से साझा किए गए 2016 से 2025 के विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि में चांदी ने सोने से बेहतर रिटर्न दिया। आइए समझते हैं कि हर साल किए गए निवेश का हिसाब क्या कहता है।

10 साल में सोने पर ₹5 लाख के निवेश की वैल्यू कितनी हुई?

रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के एमडी पृथ्वीराज कोठारी द्वारा साझा किए गए विश्लेषण के मुताबिक, अगर किसी निवेशक ने 2016 से 2025 तक हर दिवाली पर सोने में ₹50,000 लगाए होते, तो उसका कुल निवेश ₹5 लाख होता।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस निवेश की मौजूदा अनुमानित कीमत करीब ₹15.90 लाख होती। यानी शुरुआती निवेश के मुकाबले लगभग ₹10.90 लाख की बढ़त दर्ज होती।

इस गणना के अनुसार:

  • कुल निवेश: ₹5 लाख
  • अनुमानित मौजूदा मूल्य: ₹15.90 लाख
  • कुल बढ़त: लगभग 218%
  • सालाना XIRR: करीब 20.4%

चांदी में निवेश करने वालों को मिला ज्यादा फायदा

इसी अवधि में हर दिवाली ₹50,000 चांदी में लगाने वाले निवेशक का कुल निवेश भी ₹5 लाख होता। विश्लेषण के मुताबिक, इस रकम से अलग-अलग वर्षों में करीब 8.8 किलोग्राम चांदी जमा हो सकती थी।

इस चांदी की अनुमानित मौजूदा कीमत करीब ₹17.28 लाख बताई गई है।

चांदी के निवेश का हिसाब:

  • कुल निवेश: ₹5 लाख
  • अनुमानित मौजूदा मूल्य: ₹17.28 लाख
  • कुल बढ़त: लगभग 246%
  • सालाना XIRR: करीब 21.8%

इस तुलना में चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञ के मुताबिक, 2017 और 2018 की दिवाली के आसपास चांदी की कीमत 40,000 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे थी। उस समय की गई खरीदारी से निवेशकों को बाद की तेजी का लाभ मिला।

पांच साल में भी चांदी ने सोने को छोड़ा पीछे

पांच साल के निवेश की तुलना में भी चांदी का प्रदर्शन बेहतर बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति ने 2021 से 2025 तक हर दिवाली पर ₹50,000 निवेश किए होते, तो दोनों धातुओं में उसका कुल निवेश ₹2.50 लाख होता।

सोने में निवेश का अनुमान:

  • कुल निवेश: ₹2.50 लाख
  • जमा सोना: करीब 39 ग्राम
  • मौजूदा अनुमानित मूल्य: ₹5.58 लाख
  • सालाना रिटर्न: करीब 28.2%

चांदी में निवेश का अनुमान:

  • कुल निवेश: ₹2.50 लाख
  • जमा चांदी: करीब 3.2 किलोग्राम
  • मौजूदा अनुमानित मूल्य: ₹6.29 लाख
  • सालाना रिटर्न: करीब 32.7%

इस अवधि में भी चांदी ने अधिक रिटर्न दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच कीमती धातुओं में आई तेजी ने पांच साल पहले निवेश शुरू करने वालों को खासा फायदा पहुंचाया।

क्या है XIRR और निवेश में इसका महत्व?

इस रिपोर्ट में रिटर्न की गणना के लिए XIRR यानी Extended Internal Rate of Return का इस्तेमाल किया गया है। यह ऐसी गणना पद्धति है, जो अलग-अलग तारीखों पर किए गए निवेश के आधार पर सालाना रिटर्न का अनुमान लगाती है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति हर साल दिवाली पर एक निश्चित रकम निवेश करता है, तो हर निवेश की तारीख अलग होती है। XIRR इन अलग-अलग तारीखों और निवेश राशियों को ध्यान में रखकर वार्षिक रिटर्न बताता है।

हर साल निवेश करने से कैसे मिलता है फायदा?

हर साल एक निश्चित रकम निवेश करने की रणनीति से बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक संतुलित हो सकता है। जब कीमतें कम होती हैं, तो तय रकम में अधिक मात्रा खरीदी जा सकती है। वहीं, कीमतें बढ़ने पर उसी रकम से कम मात्रा मिलती है।

इस तरीके को नियमित निवेश या औसत खरीद लागत की रणनीति के रूप में समझा जा सकता है। इससे निवेशक को बाजार का सबसे सही समय चुनने की कोशिश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

हालांकि, नियमित निवेश करने से मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती। सोने और चांदी की कीमतें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार घट भी सकती हैं।

दिवाली पर खरीदारी से पहले इन खर्चों को भी समझें

कमोडिटी विशेषज्ञ अनुज गुप्ता के मुताबिक, पिछले वर्षों में मिले रिटर्न को भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव या गिरावट संभव है।

निवेश या खरीदारी से पहले इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • मेकिंग चार्ज: आभूषण खरीदने पर निर्माण शुल्क लग सकता है।
  • GST: खरीदारी के स्वरूप के अनुसार लागू कर को समझें।
  • स्टोरेज खर्च: भौतिक सोने और चांदी को सुरक्षित रखने की लागत हो सकती है।
  • खरीद-बिक्री का अंतर: खरीद और बेचने की कीमत में अंतर से वास्तविक लाभ प्रभावित हो सकता है।
  • शुद्धता और प्रमाणन: खरीदते समय धातु की शुद्धता और प्रमाणिकता जांचें।

सोना या चांदी, किसे चुनना बेहतर?

पिछले 10 साल और पांच साल के दिए गए आंकड़ों में चांदी ने सोने से अधिक रिटर्न दिया है। लेकिन केवल पुराने रिटर्न के आधार पर भविष्य का निवेश तय करना सही नहीं होगा।

सोना और चांदी दोनों की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है। निवेश का फैसला व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

इसलिए दिवाली पर सोना या चांदी खरीदते समय परंपरा के साथ-साथ लागत, शुद्धता और भविष्य की जरूरतों को भी महत्व देना जरूरी है।

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