Friday, September 25, 2026

CUJ में तैयार हुआ India Flash Drought Monitor, जिला स्तर पर मिलेगी सूखे की जानकारी.

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रांची: तेजी से विकसित होने वाले फ्लैश ड्रॉट यानी अचानक बढ़ने वाले सूखे की निगरानी के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (CUJ) के जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग ने एक वेब आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया है। India Flash Drought Monitor (IFDM) नाम के इस पोर्टल के जरिए देश में जिला स्तर तक सूखे की स्थिति पर नजर रखने और संभावित खतरे की शुरुआती जानकारी हासिल करने की सुविधा दी गई है।

इस प्लेटफॉर्म को CUJ के जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग के डॉ. शांति स्वरूप महतो ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक आंकड़ों को सरल रूप में शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, किसानों, कृषि एवं जल संसाधन से जुड़े विशेषज्ञों और प्रशासन तक पहुंचाना है।

उपग्रह और मौसम संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल

फ्लैश ड्रॉट सामान्य सूखे से अलग होता है और कम समय में तेजी से विकसित हो सकता है। मिट्टी में नमी घटने के साथ फसलों पर जल तनाव बढ़ने की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका प्रभाव खेती और जल संसाधनों के साथ किसानों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।

IFDM में मिट्टी की नमी से संबंधित NASA के SMAP सैटेलाइट डेटा और ECMWF के मौसम पूर्वानुमान का उपयोग किया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न इलाकों में मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों का विश्लेषण कर फ्लैश ड्रॉट की संभावित स्थिति को चिन्हित करने का प्रयास किया जाता है।

जिलेवार देख सकेंगे सूखे की स्थिति

पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में जिला स्तर पर सूखे की निगरानी शामिल है। उपयोगकर्ता किसी राज्य या जिले को चुनकर वहां की मौजूदा स्थिति की जानकारी देख सकते हैं।

सूखे की स्थिति को D0 से D4 तक अलग-अलग श्रेणियों में दर्शाया गया है। इससे सामान्य स्थिति से लेकर गंभीर जल तनाव तक के स्तर को समझने में मदद मिलती है।

पोर्टल में लगभग 15 दिनों तक की संभावित प्रारंभिक चेतावनी संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा किसी इलाके में सूखे से प्रभावित क्षेत्र और समय के साथ उसकी गंभीरता में हुए बदलाव को भी देखा जा सकता है।

तीन चरणों में समझने की सुविधा

IFDM पर फ्लैश ड्रॉट की स्थिति को Development, Propagation और Recovery यानी विकास, प्रसार और पुनर्प्राप्ति के चरणों के माध्यम से भी समझने की सुविधा है। इससे किसी क्षेत्र में सूखे की शुरुआत से लेकर उसके फैलाव और स्थिति में सुधार तक के बदलाव को ट्रैक किया जा सकता है।

डॉ. शांति स्वरूप महतो के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का मकसद वैज्ञानिक आंकड़ों को केवल विशेषज्ञों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आम लोगों के लिए भी आसानी से समझने योग्य बनाना है। समय रहते फ्लैश ड्रॉट की पहचान होने से कृषि और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े फैसलों में मदद मिल सकती है।

अभी विकास के चरण में है पोर्टल

डॉ. महतो ने बताया कि India Flash Drought Monitor फिलहाल विकास के चरण में है। वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों के आधार पर इसकी सुविधाओं और कार्यप्रणाली में आगे सुधार किया जाएगा।

उन्होंने इस परियोजना में सहयोग और प्रोत्साहन के लिए CUJ के जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. बिकाश रंजन परिडा तथा विभाग के सहयोगियों के प्रति आभार जताया। वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय के योगदान के लिए भी उन्होंने धन्यवाद दिया।

IFDM को फ्लैश ड्रॉट की निगरानी, शोध और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आगे भी विकसित किए जाने की योजना है।

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