Thursday, July 16, 2026

CAFE-III ड्राफ्ट जारी: नई ईंधन दक्षता नीति से बदल सकती है कार बाजार की तस्वीर, जानिए क्या होगा असर

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार वाहन क्षेत्र में ईंधन दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के उद्देश्य से कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-III) नियमों का मसौदा सार्वजनिक कर चुकी है। बिजली मंत्रालय द्वारा जारी इस ड्राफ्ट पर 6 अगस्त 2026 तक वाहन निर्माता कंपनियों, उद्योग विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद भारत में कार निर्माण और खरीद दोनों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

किन वाहनों पर लागू होंगे नए नियम?

ड्राफ्ट के अनुसार, CAFE-III मानक M1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे। इस श्रेणी में वे निजी वाहन शामिल हैं जिनमें चालक सहित अधिकतम नौ लोगों के बैठने की क्षमता हो और जिनका कुल वजन 3,500 किलोग्राम से कम हो। यानी देश में बिकने वाली अधिकांश हैचबैक, सेडान और एसयूवी इस दायरे में आएंगी। प्रस्तावित व्यवस्था वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 के बीच निर्मित या आयातित वाहनों पर लागू की जाएगी।

क्या है CAFE-III का उद्देश्य?

CAFE (Corporate Average Fuel Economy) नियम किसी एक मॉडल के माइलेज का आकलन नहीं करते। इसके बजाय, यह किसी वाहन निर्माता द्वारा एक वित्तीय वर्ष में बेची गई सभी गाड़ियों के औसत ईंधन उपयोग और कार्बन उत्सर्जन का मूल्यांकन करता है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई कंपनी अधिक ईंधन खपत वाले बड़े वाहन बेचती है, तो उसे अपने कुल उत्सर्जन स्तर को संतुलित करने के लिए अधिक ईंधन-कुशल, हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री भी बढ़ानी होगी। इन मानकों के अनुपालन की जिम्मेदारी ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के पास होगी, जो ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के तहत इसकी निगरानी करता है।

आम उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?

ईंधन खर्च में राहत:
नई नीति लागू होने के बाद वाहन कंपनियों को अधिक ईंधन दक्ष तकनीक अपनानी होगी। इससे नई कारों का माइलेज बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे वाहन मालिकों के पेट्रोल और डीजल पर होने वाले खर्च में कमी आ सकती है।

कारों की कीमत बढ़ने की संभावना:
उन्नत इंजन तकनीक, हाइब्रिड सिस्टम और बेहतर उत्सर्जन नियंत्रण तकनीकों को अपनाने से नई कारों की शुरुआती कीमत बढ़ सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर माइलेज के कारण लंबे समय में ईंधन की बचत इस अतिरिक्त लागत की भरपाई कर सकती है।

उद्योग की क्या है राय?

प्रस्तावित नीति को लेकर सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग के बीच लंबे समय से चर्चा चल रही है। पहले जारी मसौदे में वाहनों के औसत कार्बन उत्सर्जन को 113 ग्राम प्रति किलोमीटर से घटाकर 91.7 ग्राम प्रति किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया था।

ऑटो उद्योग के भीतर सबसे बड़ा विवाद छोटी और कम कीमत वाली कारों को संभावित रियायत देने को लेकर है। कुछ वाहन निर्माता ऐसे वाहनों के लिए विशेष छूट की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य कंपनियां सभी श्रेणियों पर समान नियम लागू करने की पक्षधर हैं।

अंतिम फैसला सुझावों के बाद

सरकार ने ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर सभी संबंधित पक्षों से 6 अगस्त 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद CAFE-III नीति का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह नीति आने वाले वर्षों में भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को अधिक ईंधन-कुशल और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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