Bihar Solar Village: बिहार के गांवों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अब गांवों की सोलर रैंकिंग तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। जिन गांवों में ज्यादा संख्या में सोलर सिस्टम सक्रिय पाए जाएंगे, उन्हें रैंकिंग में बेहतर स्थान मिलेगा। शीर्ष स्थान हासिल करने वाले गांवों को सोलर विलेज का दर्जा और बिजली कंपनी की ओर से प्रोत्साहन राशि दिए जाने की योजना है।
घर, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र होंगे रैंकिंग का आधार
सोलर विलेज चुनने के लिए गांव में लगे और काम कर रहे सोलर सिस्टम की संख्या को आधार बनाया जाएगा। इसके तहत केवल सरकारी संस्थानों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण घरों की छतों पर लगाए गए सोलर सिस्टम को भी गणना में शामिल किया जाएगा।
गांव के घर, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र में लगे सोलर सिस्टम रैंकिंग के लिए महत्वपूर्ण होंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घरों की छतों पर लगाए जा रहे सोलर सिस्टम भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे।
जिस गांव में इन स्थानों पर ज्यादा सोलर सिस्टम चालू स्थिति में मिलेंगे, उसे रैंकिंग में ऊपर रखा जाएगा।
सोलर स्ट्रीट लाइट की नहीं होगी गणना
गांवों में पहले से बड़ी संख्या में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। हालांकि, सोलर विलेज की रैंकिंग तय करते समय इन्हें शामिल नहीं किया जाएगा।
बिजली कंपनी का फोकस ऐसे सोलर सिस्टम पर है, जो सीधे घरों और जरूरी संस्थानों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकें। अधिकारियों का कहना है कि किसी गांव को पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर बनाना फिलहाल आसान नहीं है। इसलिए शुरुआती लक्ष्य गांवों में अधिक से अधिक सोलर सिस्टम स्थापित करना है।
बेहतर रैंकिंग वाले गांव को मिलेगा प्रोत्साहन
तय मानकों के आधार पर गांवों की रैंकिंग की जाएगी। इसमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को सोलर विलेज के रूप में पहचान दी जाएगी। बिजली कंपनी की ओर से ऐसे गांवों को प्रोत्साहन राशि भी दिए जाने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाना और लोगों को अपने घरों तथा सार्वजनिक संस्थानों में सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
बिहार में पहले भी हो चुका है सोलर गांव का प्रयोग
बिहार में सौर ऊर्जा आधारित गांव विकसित करने का प्रयोग नया नहीं है। वर्ष 2014 में जहानाबाद के धरनई गांव में सोलर माइक्रो ग्रिड स्थापित किया गया था।
इसके अलावा हाल के समय में नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड के डोईया गांव को सोलर मॉडल गांव के तौर पर विकसित करने की पहल की गई है।
अब गांवों की रैंकिंग और प्रोत्साहन व्यवस्था के जरिए बिहार में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को और विस्तार देने की तैयारी है।
