पटना, 9 अक्टूबर 2026: बिहार में इस साल आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। गंगा, गंडक, सोन और कोसी समेत प्रमुख नदियों में रिकॉर्ड जलस्तर के कारण राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। शुरुआती विभागीय आकलन के मुताबिक, बाढ़ के दो चरणों में कुल 10,671 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जल संसाधन विभाग के तटबंधों के टूटने और क्षतिग्रस्त होने से हुए नुकसान का है।
यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। ऐसे में नुकसान की वास्तविक राशि बढ़ने की आशंका जताई गई है। बाढ़ से 11 जिलों में 82,186 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है, जबकि दोनों चरणों में कुल 26 लोगों की मौत हुई है।
दो चरणों में आई बाढ़ ने बढ़ाई तबाही
बिहार में बाढ़ का असर दो अलग-अलग चरणों में देखने को मिला। पहले चरण में 26 अगस्त से 10 सितंबर के बीच राज्य से बाहर स्थित नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। इस दौरान 30 रेनगेज केंद्रों पर औसतन 225 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई।
भारी बारिश के कारण गंगा नदी का जलस्तर दानापुर, गांधीघाट, बंकाघाट, पंडारक, सुल्तानगंज और एकचारी में पुराने उच्चतम स्तर को पार कर गया। दरधा नदी ने भी कोल्हाचक में जलस्तर का नया रिकॉर्ड बनाया।
दूसरे चरण में 24 से 30 सितंबर के बीच नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश से गंडक नदी में पानी का दबाव बढ़ गया। इस दौरान 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया।
गंडक नदी ने बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में पुराने उच्चतम जलस्तर के रिकॉर्ड तोड़े। पानी के भारी दबाव से नदी के छह स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए।
पहले चरण में 9,617 करोड़ रुपये का नुकसान
पहले चरण की बाढ़ से 9,617 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन किया गया है। विभिन्न विभागों की ओर से दर्ज नुकसान का विवरण इस प्रकार है:
| विभाग | अनुमानित नुकसान |
|---|---|
| जल संसाधन विभाग | 5,472 करोड़ रुपये |
| आपदा प्रबंधन विभाग | 2,710 करोड़ रुपये |
| ग्रामीण कार्य विभाग | 1,062 करोड़ रुपये |
| कृषि विभाग | 270 करोड़ रुपये |
| पथ निर्माण विभाग | 76 करोड़ रुपये |
| लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग | 27 करोड़ रुपये |
इन आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में तटबंधों को हुए नुकसान का हिस्सा सबसे अधिक रहा।
दूसरे चरण में 1,054 करोड़ रुपये की क्षति
दूसरे चरण की बाढ़ से कुल 1,054 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। इसमें जल संसाधन विभाग ने 1,027.34 करोड़ रुपये और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने 26.81 करोड़ रुपये की क्षति बताई है।
दोनों चरणों के विभागीय आकलन को जोड़ने पर नुकसान की राशि 10,671 करोड़ रुपये पहुंचती है। हालांकि, यह अंतिम आंकड़ा नहीं है और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद इसमें बदलाव हो सकता है।
तटबंधों की मरम्मत के लिए करीब 1,027 करोड़ रुपये की मांग
गंडक नदी के तटबंध क्षतिग्रस्त होने से पश्चिम चंपारण के बगहा-एक, बैरिया और योगापट्टी, गोपालगंज के बैकुंठपुर तथा सारण के मकेर और पानापुर प्रखंड प्रभावित हुए।
जल संसाधन विभाग ने क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत और सुरक्षा मजबूत करने के लिए अलग-अलग मदों में राशि की मांग की है। इसमें 28 करोड़ 65 लाख रुपये क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत, 973 करोड़ 69 लाख रुपये चंपारण, तिरहुत और अन्य तटबंधों के सुदृढ़ीकरण तथा 25 करोड़ रुपये बाढ़ से पहले मरम्मत कार्यों के लिए मांगे गए हैं।
इन कार्यों का उद्देश्य तटबंधों को मजबूत करना और भविष्य में बाढ़ के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना है।
82 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल बर्बाद
बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ा है। कृषि विभाग के आकलन के अनुसार, राज्य के 11 जिलों में 82,186 हेक्टेयर में फसल बर्बाद होने का अनुमान है।
खेतों में पानी भरने और फसल डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। अंतिम सर्वेक्षण के बाद फसल क्षति का वास्तविक आंकड़ा और प्रभावित किसानों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बाढ़ से 26 लोगों की मौत, सारण में सबसे ज्यादा नुकसान
दोनों चरणों की बाढ़ में बिहार में कुल 26 लोगों की मौत हुई है। पहले चरण में आठ और दूसरे चरण में 18 लोगों की जान गई।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, सारण में 15 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा मुंगेर में चार, पश्चिम चंपारण में तीन, भोजपुर में दो और भागलपुर में दो लोगों की जान गई।
राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया जा रहा है।
अंतिम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी नुकसान की पूरी तस्वीर
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन अभी जारी है। कई विभागों की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद कुल आर्थिक क्षति की तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल तटबंधों की मरम्मत, प्रभावित इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की बहाली और किसानों को हुए नुकसान का आकलन प्रमुख मुद्दे हैं।
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