पटना: बिहार में पोषण और खानपान की स्थिति को लेकर हुए विशेष डाइट स्क्रीनिंग अभियान में अहम तस्वीर सामने आई है। राज्य में जांच किए गए लोगों में करीब 49.3 प्रतिशत नागरिकों का खानपान लो-रिस्क, यानी संतुलित और अपेक्षाकृत सुरक्षित श्रेणी में पाया गया।
इस अभियान के दौरान कुल 77,194 लोगों की डाइट स्क्रीनिंग की गई। इनमें 38,043 लोग लो-रिस्क श्रेणी में मिले। स्क्रीनिंग का उद्देश्य लोगों की खानपान संबंधी आदतों का आकलन कर पोषण से जुड़ी जरूरतों की पहचान करना था।
25 लाख से ज्यादा लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच
बिहार में 2 से 9 सितंबर तक चलाए गए विशेष सघन अभियान के दौरान कुल 25,24,105 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई।
अभियान से स्वास्थ्य विभाग को लोगों के पोषण और खानपान से संबंधित जमीनी स्तर का डेटा जुटाने में मदद मिली है। जिन लोगों को बेहतर पोषण और खानपान की जरूरत है, उनकी पहचान कर आगे जागरूकता और परामर्श का काम किया जाएगा।
इसके लिए आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को बेहतर भोजन और संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने की योजना है।
डाइट स्क्रीनिंग में औरंगाबाद सबसे आगे
घर-घर जाकर डिजिटल चेकलिस्ट के जरिए खानपान की आदतों का आकलन किया गया। इस मामले में औरंगाबाद जिला सबसे आगे रहा।
वहां कुल 13,070 लोगों की डाइट स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद समस्तीपुर में 9,628, सारण में 4,391, नालंदा में 4,151 और मधुबनी में 2,992 लोगों का डाइट असेसमेंट हुआ।
पश्चिम चंपारण में सबसे बेहतर खानपान
जिलावार खानपान की गुणवत्ता के आंकड़ों में पश्चिम चंपारण सबसे ऊपर रहा। यहां स्क्रीनिंग में शामिल 71.6 प्रतिशत लोगों की खानपान संबंधी आदतें उत्तम श्रेणी में पाई गईं।
इसके बाद लखीसराय 69.5 प्रतिशत के साथ दूसरे और भोजपुर 67.3 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
अन्य जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| जिला | बेहतर खानपान वाले लोगों का प्रतिशत |
|---|---|
| पश्चिम चंपारण | 71.6% |
| लखीसराय | 69.5% |
| भोजपुर | 67.3% |
| मुजफ्फरपुर | 65.1% |
| खगड़िया | 60.0% |
| बेगूसराय | 59.2% |
| मुंगेर | 58.7% |
| किशनगंज | 58.1% |
पोषण सुधार के लिए आगे चलेगा जागरूकता अभियान
डाइट स्क्रीनिंग से मिले आंकड़ों के आधार पर अब उन लोगों तक पहुंचने पर जोर दिया जाएगा, जिन्हें खानपान में अतिरिक्त सुधार की जरूरत है। स्वास्थ्यकर्मी उन्हें संतुलित और बेहतर भोजन की आदतों के बारे में जानकारी देंगे।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे राज्य में पोषण संबंधी स्थिति का डिजिटल और जमीनी डेटा तैयार हुआ है, जिसका इस्तेमाल आगे स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े प्रयासों की योजना बनाने में किया जा सकता है।
