रांची: गुरु पूर्णिमा के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने धुर्वा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘अरुणोदय’ का विमोचन किया और भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें जीवन का सच्चा मार्गदर्शक कहा।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और सही जीवन दिशा देने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है।
उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ अनुशासन, सेवा, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। उनके अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक तैयार करना भी है।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ विज्ञान, तकनीक, कंप्यूटर, खेलकूद, योग, संस्कृत, संगीत और नैतिक शिक्षा का संतुलित समावेश विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा, समग्र विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, अनुशासन का पालन करने, निरंतर सीखते रहने तथा माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने का आग्रह किया। वहीं शिक्षकों से उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन में केवल छात्रों का भविष्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्र का भविष्य भी आकार लेता है।
