Tuesday, July 28, 2026

बिहार में पेपर लीक मामलों की होगी त्वरित सुनवाई, पटना, लखीसराय और पूर्णिया में बनेंगी विशेष अदालतें.

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पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पटना हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए राज्य के तीन जिलों—पटना, लखीसराय और पूर्णिया—में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट स्थापित करने का निर्णय लिया है।

इन अदालतों में द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मींस) एक्ट, 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। उद्देश्य यह है कि परीक्षा से जुड़े अपराधों का जल्द निपटारा हो और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

90 दिनों के भीतर सुनाया जाएगा फैसला

हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जैसे ही किसी मामले में चार्जशीट दाखिल होगी, उसकी नियमित सुनवाई शुरू कर दी जाएगी। विशेष अदालतों में रोजाना ट्रायल चलाया जाएगा और प्रयास रहेगा कि मुकदमे का फैसला 90 दिनों के भीतर सुना दिया जाए। इससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों में तेजी आने की उम्मीद है।

तीन न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति

इन विशेष अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों का भी चयन कर लिया गया है। पटना में गौरव सिंह, लखीसराय में सीमा भारतीय और पूर्णिया में ठाकुर अमन कुमार को पीठासीन अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अदालतों को जल्द अधिसूचित कर आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है।

परीक्षा विवादों के बाद उठाया गया कदम

हाल के वर्षों में बिहार में कई प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं, जिनमें बीपीएससी और नीट जैसी परीक्षाएं भी शामिल हैं, के दौरान पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच और न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ा था। नई विशेष अदालतों के गठन से ऐसे मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल

विशेष अदालतों के माध्यम से परीक्षा संबंधी अपराधों पर सख्ती बढ़ने की संभावना है। नियमित सुनवाई और तय समयसीमा में फैसले आने से संगठित पेपर लीक गिरोहों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सख्त कानूनी प्रावधान

परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए केंद्र सरकार ने भी कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए हैं। नए कानून के तहत पेपर लीक या परीक्षा में धोखाधड़ी के मामलों में दोषी पाए जाने वालों के लिए कठोर सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

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