Saturday, July 18, 2026

झारखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, लिखित परीक्षा और मेडिकल टेस्ट होंगे अनिवार्य.

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रांची: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार नए परिनियम के तहत चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद अभ्यर्थियों के लिए लिखित परीक्षा और मेडिकल जांच दोनों अनिवार्य होंगे।

नेट और जेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को भी देनी होगी परीक्षा

नई व्यवस्था के अनुसार, राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) और झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) उत्तीर्ण उम्मीदवारों को भी नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। केवल लिखित परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। हालांकि, पीएचडी और नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसर के अनुभव को चयन प्रक्रिया में निर्धारित वेटेज दिए जाने का प्रस्ताव है।

अब विश्वविद्यालय सेवा आयोग करेगा नियुक्ति

प्रस्तावित नियमों के तहत असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती का दायित्व झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग को सौंपा जाएगा। इससे पहले यह प्रक्रिया झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से संचालित होती थी। वर्तमान व्यवस्था में NET, JET या पीएचडी योग्य अभ्यर्थियों का चयन मुख्य रूप से साक्षात्कार के आधार पर किया जाता था।

हर साल तय समयसीमा में पूरी होगी भर्ती

प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष जनवरी से शुरू होकर 30 जून तक पूरी की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के समन्वय की जिम्मेदारी मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक की होगी।

इसके लिए प्रत्येक वर्ष 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पदों और रिक्तियों का आकलन कर रोस्टर तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद उसी आधार पर अगले वर्ष की भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।

चयन के बाद मिलेगा अनिवार्य प्रशिक्षण

नियुक्ति प्राप्त करने वाले सभी शिक्षकों को झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी में 12 महीने का अनिवार्य प्रशिक्षण लेना होगा। इसके बाद उन्हें दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रखा जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में होगी पहली पोस्टिंग

नई नीति के तहत नव नियुक्त शिक्षकों की पहली तैनाती विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र के ग्रामीण और दूरस्थ महाविद्यालयों में किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा शिक्षकों का राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय या अंगीभूत कॉलेज में स्थानांतरण अथवा प्रतिनियुक्ति की जा सकेगी। हालांकि, परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षकों पर स्थानांतरण संबंधी प्रावधान लागू नहीं होंगे।

राज्य सरकार के पास रहेगा विशेष अधिकार

प्रस्तावित परिनियम के अनुसार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षकों के स्थानांतरण का विशेष अधिकार राज्य सरकार के पास रहेगा। सरकार का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाना है।

फिलहाल यह प्रस्ताव अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया में है। इसे लागू करने से पहले संबंधित विश्वविद्यालयों के सिंडिकेट की स्वीकृति ली जाएगी, जिसके बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय करेगी।

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