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रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर, रजरप्पा में शुक्रवार को सनातन परंपरा, वैदिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक उल्लास के बीच आषाढ़ी महापूजा पूरे विधि-विधान से संपन्न हुई. इस विशेष अवसर पर मां छिन्नमस्तिका का दिव्य एवं अलौकिक शृंगार किया गया. मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच मां को 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) और मौसमी फलों का भोग अर्पित कर समय पर अच्छी वर्षा, भरपूर कृषि उत्पादन, राज्य की समृद्धि, सामाजिक सौहार्द और समस्त मानव जाति के कल्याण की कामना की गई.
शुक्रवार सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया. पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मंगलध्वनि के साथ मंदिर के पुजारी गर्भगृह पहुंचे और विशेष पूजा की शुरुआत हुई. सबसे पहले मां का दूध, गंगाजल, शहद, दही, घृत तथा अन्य पवित्र द्रव्यों से महाअभिषेक किया गया. इसके बाद गुलाब, कमल, चमेली और सुगंधित पुष्पों से माता का मनोहारी शृंगार किया गया. पूजा में शामिल होकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए.
आषाढ़ी महापूजा का सबसे विशेष आकर्षण रहा छप्पन भोग. मंदिर के पुजारियों ने परंपरा का निर्वहन करते हुए स्वयं विभिन्न प्रकार के व्यंजन तैयार किए. इसके बाद पूरी श्रद्धा के साथ मां के श्रीचरणों में अर्पित किया. पूजा के दौरान राज्य में अच्छी बारिश, किसानों की खुशहाली, भरपूर फसल, सुख-शांति, आर्थिक उन्नति, प्राकृतिक संतुलन और सभी श्रद्धालुओं के जीवन में मंगल की प्रार्थना की गई.
रजरप्पा मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सुबोध पंडा ने बताया कि पूरे अनुष्ठान के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखनाद और मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि से संपूर्ण मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा. वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच करीब एक घंटे तक चले इस विशेष अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया.
महाआरती के उपरांत मां को अर्पित छप्पन भोग प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया. प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला.
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी लोकेश पंडा ने बताया कि आषाढ़ी पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और लोक कल्याण से जुड़ी प्राचीन सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है. इस पूजा के माध्यम से मां छिन्नमस्तिका से समय पर वर्षा, अन्न-धन की समृद्धि, राज्य की उन्नति और विश्व कल्याण का आशीर्वाद मांगा जाता है.
वैसे तो मां छिन्नमस्तिका मंदिर में सालों भर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन आषाढ़ी पूजा के अवसर पर रजरप्पा धाम पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है. पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह और आस्था का अद्भुत वातावरण बना रहा.