सर्दी और फ्लू आमतौर पर सर्दियों या मॉनसून के मौसम में लोगों को ज्यादा प्रभावित करते हैं, लेकिन आजकल गर्मियों में भी यह समस्या तेजी से देखी जा रही है. डॉक्टर हाल ही में अपने क्लीनिक में एक अलग पैटर्न देख रहे हैं, भीषण गर्मी के बावजूद, मरीज सर्दियों में होने वाली बीमारियों जैसे लक्षण लेकर आ रहे हैं, जैसे कि बहुत ज्यादा थकान, शरीर में दर्द, कंपकंपी और आम तौर पर अस्वस्थ महसूस करना. जब बाहर भीषण गर्मी हो, तो लोग फ्लू जैसे लक्षणों की उम्मीद नहीं करते, लेकिन, लगातार हाई टेम्परेचर और गर्मी के लंबे संपर्क में रहने से शरीर के अंदरूनी तापमान और उसे रेगुलेट करने वाले नेचुरल सिस्टम पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. इस ‘हीट स्ट्रेस’ या हीट एग्जॉशन के शुरुआती लक्षणों को लोग अक्सर वायरल इन्फेक्शन, सर्दी या फ्लू समझ लेते हैं. इस संदर्भ में, आइए जानें कि बहुत ज्यादा गर्मी में शरीर की प्रतिक्रिया को कैसे पहचानें और वायरल या मौसमी बुखार से इसका अंतर कैसे समझें…’हीट एग्जॉशन’ (गर्मी से बहुत ज्यादा थकान) को वायरल बीमारी समझना आसान है क्योंकि इनके शारीरिक लक्षण काफी हद तक एक जैसे होते हैं. जब आप बहुत ज्यादा गर्मी के संपर्क में आते हैं, तो स्किन तक खून पहुंचाने के लिए आपका दिल तेजी से धड़कता है, जिससे गर्मी बाहर निकल सके. शरीर को ठंडा रखने के लिए आपको बहुत ज्यादा पसीना आता है.
शरीर को अंदर से ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में बहुत ज्यादा एनर्जी लगती है. जब शरीर को घंटों या दिनों तक यह कोशिश जारी रखनी पड़ती है, तो इससे पूरे शरीर में तनाव वाली प्रतिक्रिया (सिस्टमिक स्ट्रेस रिस्पॉन्स) शुरू हो जाती है. इसके कारण होने वाली बहुत ज्यादा थकान, मांसपेशियों में दर्द और हल्का जी-मिचलाना भी लगभग वैसा ही होता है जैसा फ्लू वायरस से लड़ते समय शरीर में सूजन वाली प्रतिक्रिया (इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स) होती है.
इसके अलावा, हमारी आदतें भी सर्दी-जुकाम जैसा भ्रम पैदा करती हैं. बाहर की तेज गर्मी से अचानक बहुत ज्यादा एयर-कंडीशंड (AC) जगहों पर जाने से सांस लेने वाले सिस्टम को झटका लगता है. तापमान में इस तेजी से बदलाव के कारण नाक और गले की ब्लड वेसेल्स सिकुड़ सकती हैं, जिससे नाक बंद होना, नाक बहना और अचानक ठंड लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
इसके साथ ही लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से नींद का पैटर्न भी बिगड़ जाता है. जब रात में शरीर का तापमान ठीक से कम नहीं हो पाता, तो अच्छी और आरामदायक नींद नहीं मिल पाती. समय के साथ, इस तरह लगातार थकान जमा होने से इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे रोजाना के रोगाणुओं से लड़ना मुश्किल हो जाता है.
लक्षणों को पहचानना और सही समय पर कदम उठाना जरूरी
गर्मी से होने वाली हल्की प्रतिक्रिया और गंभीर मेडिकल स्थिति के बीच अंतर समझना बहुत जरूरी है. गर्मी से होने वाली बीमारी के शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं…
- बहुत ज्यादा पसीना आना और त्वचा का ठंडा व चिपचिपा होना
- मांसपेशियों में ऐंठन और शरीर में दर्द
- बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी
- चक्कर आना
- सिरदर्द या सिर घूमना
- हल्का जी मिचलाना या भूख न लगना.
लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने से न सिर्फ बीमारी जैसे लक्षण दिखते हैं, बल्कि यह आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है और बीमारियों से लड़ने की आपकी क्षमता को कम कर सकता है. इसकी मुख्य वजह डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) है. पसीना आने से शरीर का पानी और जरूरी मिनरल (इलेक्ट्रोलाइट्स) कम हो जाते हैं, जो कोशिकाओं के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होते हैं. जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो नाक, गले और सांस की नली की सुरक्षा करने वाली म्यूकस झिल्लियां सूखने लगती हैं. ये झिल्लियां ही पैथोजन्स से बचाव की पहली लाइन होती हैं. धूल, एलर्जी पैदा करने वाले कणों और हवा में मौजूद वायरस को रोकने के लिए जरूरी नमी न होने पर, आपको गर्मियों में होने वाली सर्दी-जुकाम और सांस के संक्रमण का खतरा ज्यादा हो जाता है.
सबसे ज्यादा खतरा किसे है?
हालांकि भीषण गर्मी किसी को भी प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ खास समूहों को इससे ज्यादा खतरा होता है. बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दिल की बीमारी या डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारियों वाले लोगों को अपने शरीर का अंदरूनी तापमान नियंत्रित करने में ज्यादा मुश्किल होती है. जो लोग घर के बाहर काम करते हैं, उन्हें भी लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने के कारण काफी ज्यादा खतरा होता है.
डॉक्टर को कब दिखाएं
हीट एग्जॉशन (गर्मी से बहुत ज्यादा थकान) तेजी से हीट स्ट्रोक में बदल सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है. अगर आपको या किसी और को ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें…
- शरीर का तापमान 103°F से ज्यादा होना
- त्वचा का गर्म, लाल और सूखा होना (पसीना बिल्कुल न आना)
- तेज और जोरदार नब्ज चलना
- उलझन होना
- बोलने में लड़खड़ाहट या मानसिक स्थिति में बदलाव
- लगातार उल्टी होना या कुछ भी तरल पदार्थ न पचा पाना
बचाव के लिए प्रैक्टिकल तरीके
डॉ. दिव्या गोपाल का कहना है कि गर्मी से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए सिर्फ छांव में रहना काफी नहीं है. गर्मियों के महीनों में अपने शरीर का खास ख्याल रखना जरूरी है, जिसके लिए ये उपाय अपनाएं…
- शरीर में पानी की कमी न होने दें: पानी पीना बहुत जरूरी है, लेकिन अगर आपको बहुत ज्यादा पसीना आ रहा है, तो सिर्फ पानी काफी नहीं है, आपको शरीर से निकले मिनरल्स की भरपाई भी करनी होगी. इसके लिए अपनी दिनचर्या में इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर ड्रिंक्स, नारियल पानी या सूप शामिल करें और ज्यादा कैफीन और शराब से बचें, क्योंकि इनसे डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) हो सकता है.
- टेम्परेचर में बदलाव को मैनेज करें: बहुत ज्यादा गर्मी से अचानक बहुत ठंडे, एयर-कंडीशन्ड माहौल में जाने से बचें. अगर आपको पता है कि आप बहुत ठंडी बिल्डिंग में जा रहे हैं, तो हल्के कपड़े साथ रखें ताकि आपका शरीर आसानी से टेम्परेचर के हिसाब से एडजस्ट हो सके.
- अपनी आउटडोर एक्टिविटीज का समय तय करें: ज्यादा मेहनत वाली आउटडोर एक्टिविटीज सुबह जल्दी या देर शाम के लिए शेड्यूल करें जब धूप कम तेज हो.
- सोच-समझकर कपड़े पहनें: ढीले-ढाले, हल्के और हल्के रंग के कपड़े पहनें. इससे हवा आपकी स्किन तक पहुंचती है और पसीना आसानी से निकल जाता है.
- खूब आराम करें: अपने शरीर की सुनें. अगर आपको अचानक बहुत ज्यादा थकान महसूस हो, तो खुद पर काम करते रहने का दबाव न डालें. ठंडी जगह पर आराम करें, अपने पैरों को थोड़ा ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे ठंडे लिक्विड पिएं.


