भारत में प्रोस्टेट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं (खासकर 55 साल से ज्यादा उम्र के पुरुषों में), और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इसका मुख्य कारण है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सटीक इमेजिंग (जैसे PSMA-PET स्कैन), और रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी ने डायग्नोसिस और इलाज के तरीकों में क्रांति ला दी है. मतलब, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड इमेजिंग (PSMA-PET) की मदद से ट्यूमर की सटीक मैपिंग संभव हो गई है. वहीं, रोबोटिक सर्जरी और प्रिसिजन रेडिएशन से स्वस्थ टिशू को बचाते हुए सफल इलाज करना आसान हो गया है. यह आधुनिक तकनीकें डॉक्टरों को कैंसर का पहले पता लगाने, पहले से कहीं अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से इलाज करने में मदद कर रही हैं.
मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में यूरोलॉजी, यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. संतोष नागवंकर का कहना है कि उन्होंने प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए एक बड़ा, टेक्नोलॉजी वाला तरीका अपनाया है, जो मरीजों को बीमारी का पता चलने से लेकर ठीक होने तक सपोर्ट करता है. सबसे बड़े बदलावों में से एक मल्टीपैरामेट्रिक MRI (mpMRI) को AI-पावर्ड रिपोर्टिंग सिस्टम के साथ जोड़ना है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने MRI रिपोर्टिंग में लाया है क्रांतिकारी बदलाव
डॉ. संतोष नागवंकर का कहना है कि सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, स्पेन की मेडिकल इमेजिंग AI कंपनी ‘क्विबिम’ (Quibim) द्वारा बनाए गए QP-प्रोस्टेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता है. यह एडवांस्ड सॉफ्टवेयर प्रोस्टेट MRI स्कैन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है, जिससे रेडियोलॉजिस्ट को संदिग्ध घावों की पहचान करने, प्रोस्टेट की बनावट को समझने, प्रोस्टेट का वॉल्यूम मापने और बहुत सटीक व स्टैंडर्ड रिपोर्ट तैयार करने में मदद मिलती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने MRI रिपोर्टिंग में क्रांतिकारी बदलाव किया है. स्टडीज से पता चलता है कि यह टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजिस्ट को शरीर के टिश्यूज में मामूली असामान्यताओं का सटीक पता लगाने में मदद करती है, जिससे क्लिनिकल फैसले लेने में आसानी होती है. इसके अलावा, AI इमेजिंग क्वालिटी कंट्रोल और स्कैनिंग प्रोसेस को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है, जिससे यह पक्का होता है कि इमेजिंग हमेशा सटीक डायग्नोसिस के लिए जरूरी स्टैंडर्ड्स को पूरा करे.

संदिग्ध घावों की बहुत सटीक पहचान और सैंपलिंग
डायग्नोसिस की प्रक्रिया में अगला कदम टारगेटेड बायोप्सी है. पहले, प्रोस्टेट बायोप्सी के लिए सिस्टेमैटिक सैंपलिंग स्टैंडर्ड तरीका था. (एक ऐसी तकनीक जो कभी-कभी क्लिनिकली महत्वपूर्ण कैंसर का पता लगाने में नाकाम रहती थी) आज, MRI-गाइडेड टारगेटेड बायोप्सी ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है. MRI-गाइडेड टारगेटेड बायोप्सी और MRI-अल्ट्रासाउंड फ्यूजन टेक्नोलॉजी ने प्रोस्टेट कैंसर के डायग्नोसिस में क्रांति ला दी है. यह तकनीक सटीक MRI स्कैन की हाई-रिजॉल्यूशन डिटेल को रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड के साथ जोड़ती है, जिससे संदिग्ध घावों (lesions) की बहुत सटीक पहचान और सैंपलिंग संभव हो पाती है.
असल में, MRI पर पहचाने गए संदिग्ध घावों को MRI-अल्ट्रासाउंड फ्यूजन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सटीक रूप से टारगेट किया जाता है, जिसमें AI-बेस्ड घाव की मैपिंग और सेगमेंटेशन का सहयोग मिलता है. MRI डेटा को रियल-टाइम अल्ट्रासाउंड इमेज के साथ मिलाकर, यूरोलॉजिस्ट उन हिस्सों की सटीक सैंपलिंग कर सकते हैं जहां गंभीर बीमारी होने की सबसे ज्यादा संभावना होती है. यह तरीका कैंसर का पता लगाने की दर को बेहतर बनाता है और साथ ही अनावश्यक बायोप्सी और कम आक्रामक बीमारी के ओवर-डायग्नोसिस को कम करता है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बदल रहा है सर्जरी के तरीके
डॉ. संतोष नागवंकर का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्जरी के तरीकों को भी बदल रहा है. प्रोस्टेट कैंसर (जो शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैला है) वाले कई मरीजों के लिए रोबोट की मदद से की जाने वाली ‘रैडिकल प्रोस्टेटेक्टॉमी’ सर्जरी का पसंदीदा विकल्प बन गई है. रोबोटिक सिस्टम सर्जनों को चीजों का बड़ा और थ्री-डी (3D) व्यू, बेहतर काम करने की क्षमता और बहुत ज्यादा सटीकता देते हैं. रोबोटिक सर्जरी और प्रिसिजन रेडिएशन (जैसे स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी) जैसी तकनीकें प्रोस्टेट कैंसर और दूसरी जटिल बीमारियों का इलाज करते समय ट्यूमर को बहुत सटीकता से खत्म करती हैं, जिससे आस-पास के स्वस्थ टिश्यू और नसों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है.
AI-आधारित नई क्षमताएं सर्जिकल प्लानिंग को बेहतर बनाकर, जरूरी अंगों की पहचान में मदद करके, सर्जरी के दौरान होने वाले कामों (वर्कफ्लो) का विश्लेषण करके और सर्जरी के दौरान फैसले लेने में सहायता करके इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं. ये तरक्कियां कैंसर को बेहतर ढंग से कंट्रोल करने में मदद करती हैं और साथ ही यूरिन कंट्रोल और सेक्सुअल फंक्शन को ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित रखती हैं, ये ऐसी बातें हैं जो इलाज के बाद जीवन की क्वालिटी पर काफी असर डालती हैं।
डॉ. संतोष नागवंकर का कहना है कि आगे चलकर, प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का तरीका हर मरीज के लिए अलग-अलग (पर्सनलाइज्ड) होगा. AI सिस्टम अब सिर्फ कैंसर का पता लगाने वाले साधारण टूल से बदलकर ऐसे एडवांस्ड प्लेटफॉर्म बन रहे हैं जो कैंसर के बढ़ने की रफ्तार और इलाज के असर का अंदाजा लगा सकते हैं, साथ ही हर मरीज के लिए खास इलाज की योजना बनाने में भी मदद कर सकते हैं. एडवांस्ड इमेजिंग, जीनोमिक प्रोफाइलिंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स को मिलाकर, ये टेक्नोलॉजी डॉक्टरों को सही समय पर सही मरीज के लिए सही इलाज चुनने में मदद करेंगी.
हर कोई आसानी से करवा सकेगा इलाज
भारत जैसे देश में, जहां प्रोस्टेट कैंसर के लिए एक्सपर्ट देखभाल तक पहुंच अलग-अलग इलाकों में बहुत अलग हो सकती है, AI खास जानकारी और एक्सपर्ट सलाह तक पहुंच को सबके लिए आसान बनाने का एक शानदार मौका देता है. स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग, क्लिनिकल फैसले लेने में मदद करने वाले सिस्टम और टेक्नोलॉजी-आधारित डायग्नोस्टिक्स के जरिए, कैंसर की अच्छी क्वालिटी वाली देखभाल बड़ी आबादी तक पहुंच सकती है. इससे काम तेजी से होता है और बीमारी का पता लगाने में होने वाली देरी कम होती है.
मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फॉउंडेशन हॉस्पिटल में, ये नई टेक्नोलॉजी पहले ही कैंसर का जल्दी पता लगाने, बेहतर इलाज और मरीजों के लिए बेहतर नतीजों में मदद कर रही हैं. प्रोस्टेट कैंसर की देखभाल का भविष्य सिर्फ ज्यादा स्मार्ट नहीं है, यह पहले से कहीं ज्यादा सटीक, हर मरीज की जरूरतों के हिसाब से और मरीज पर केंद्रित है.



