Wednesday, July 1, 2026

जून 2026 में भारत का जीएसटी संग्रह 13.9% बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़ हुआ, जिसमें आयात टैक्स की भारी उछाल का मुख्य योगदान रहा.

Share

नई दिल्ली: भारत का सकल वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह जून 2026 में 13.9 प्रतिशत बढ़कर ₹1,94,812 करोड़ पर पहुंच गया है. पिछले साल जून 2025 में यह आंकड़ा ₹1,71,105 करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार टैक्स कलेक्शन में यह बड़ी उछाल मुख्य रूप से विदेशी सामानों के आयात से होने वाली कमाई में भारी बढ़ोतरी के कारण आई है.

  • सभी रिफंड वापस करने के बाद, सरकार का कुल शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11.2 प्रतिशत ज्यादा है.
  • आयात और घरेलू टैक्स में बड़ा अंतर
    इस महीने के आंकड़ों में घरेलू व्यापार और विदेशी आयात के टैक्स में बड़ा अंतर देखा गया है. जहां एक तरफ देश के भीतर होने वाले व्यापार में केवल 6.5 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और यह ₹1,34,774 करोड़ रहा, वहीं दूसरी तरफ विदेशों से आने वाले सामान पर मिलने वाला टैक्स 34.6 प्रतिशत की भारी रफ्तार से बढ़कर ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया. इसके अलावा, सरकार ने इस महीने ₹32,436 करोड़ का रिफंड भी जारी किया, जो पिछले साल से 29.1 प्रतिशत अधिक है.
  • चालू वित्त वर्ष की स्थिति
    यदि इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से जून 2026) की बात करें, तो कुल मिलाकर ₹6,31,699 करोड़ का जीएसटी संग्रह हुआ है. यह पिछले साल की इसी अवधि से 8.4 प्रतिशत अधिक है. इस तीन महीने की अवधि में भी आयात टैक्स 26.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,77,273 करोड़ रहा, जबकि घरेलू टैक्स में सिर्फ 2.8 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई.
  • राज्यों का हाल: कहीं खुशी, कहीं निराशा
    देश के अलग-अलग राज्यों में टैक्स संग्रह का प्रदर्शन मिला-जुला रहा:
  • बढ़त वाले राज्य: महाराष्ट्र ₹30,714 करोड़ के साथ सबसे आगे रहा, जहां 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उत्तर प्रदेश ने 19 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ ₹9,165 करोड़ कमाए. कर्नाटक (+10%) और गुजरात (+12%) भी मजबूत रहे.

गिरावट वाले राज्य: कुछ राज्यों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. सिक्किम का टैक्स कलेक्शन 53 प्रतिशत घटकर केवल ₹170 करोड़ रह गया. पुडुचेरी में 28 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 26 प्रतिशत और उत्तराखंड में 21 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई. तमिलनाडु में भी कलेक्शन 2 प्रतिशत घटकर ₹9,776 करोड़ रह गया.

विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी देश की बाहरी व्यापारिक गतिविधियों को दर्शाती है, लेकिन घरेलू बाजार में मांग को और मजबूत करने की जरूरत है.

Read more

Local News