झारखंड राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अधिकतर अस्पताल इलाज से इनकार कर रहे हैं, जिससे पुलिसकर्मी पीड़ित हैं। इस साल 50 से अधिक पुलिसकर्मियों को योजना का लाभ न मिलने पर पुलिस कल्याण कोष से मदद मिली है।
रांची। झारखंड में सरकार की महत्वाकांक्षी राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना के हेल्थ कार्ड को अधिकतर अस्पताल स्वीकार नहीं कर रहे हैं। दैनिक जागरण के पास ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध लगातार शिकायतें मिल रहीं हैं।
- झारखंड पुलिस के सर्वाधिक जवान व कनीय पुलिस पदाधिकारी इसके पीड़ित हैंं। अस्पतालों के माध्यम से इलाज से इन्कार करने पर वे इसकी शिकायत अपने एसोसिएशन के माध्यम से केंद्रीय कमेटी व पुलिस मुख्यालय से कर रहे हैं।
इस वर्ष 2026 में ऐसे 50 पुलिसकर्मियों, कनीय पुलिस पदाधिकारियों का मामला सामने आया है, जिन्हें राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना से अस्पतालों ने इलाज से इन्कार किया तो उनके एसोसिएशन ने उन्हें पुलिस कल्याण कोष से उन्हें आर्थिक मदद दिलाया है।
जागरण में शनिवार को इससे जुड़ी खबर व उसपर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के मंत्री डाॅ. इरफान अंसारी के कार्रवाई के आश्वासन के प्रकाशन के बाद से ही पुलिसकर्मी व पुलिस पदाधिकारी इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर लगातार इस योजना का विरोध कर रहे हैं।
उनका कहना है कि राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना का उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है, इसे बंद कर किसी कारगर योजना को लागू किया जाना चाहिए, ताकि सदस्यों का बिना किसी परेशानी के इलाज हो सके।
ये हैं कुछ ताजा उदाहरण, जिन्हें पुलिस मुख्यालय से स्वीकृत हुई कल्याण कोष से राशि
दारोगा रंजीत उरांव, धनबाद (एक लाख रुपये), एएसआइ जितेंद्र कुमार, रेल धनबाद (एक लाख रुपये), एएसआइ लाल बाबू पांडेय, धनबाद (75 हजार रुपये), एएसआइ मनोज कुमार सिंह, सीआइडी (50 हजार रुपये), एएसआइ गिरिश कुमार ओझा, रांची (75 हजार रुपये), एएसआइ रामनाथ बानरा, सरायकेला (एक लाख रुपये), इंस्पेक्टर आभाष कुमार, हजारीबाग (एक लाख रुपये), एएसआइ संतोष कुमार मिश्रा, सीआइडी (एक लाख रुपये), एएसआइ संतोष कुमार, जमशेदपुर (50 हजार रुपये), एएसआइ ओमप्रकाश कुमार मस्ताना, रांची (75 हजार रुपये), दारोगा रामदयाल महतो, पलामू (75 हजार रुपये) व एएसआइ अजीत पीटर टोप्पो, जमशेदपुर (50 हजार रुपये)।
पुलिस विभाग के लिए बीमा कंपनी को हर माह छह करोड़ रुपये
बीमा कंपनी टाटा एआइजी से राज्यकर्मियों के लिए राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना संचालित है। सिर्फ झारखंड पुलिस में सिपाही से इंस्पेक्टर तह करीब 60 हजार लाभुक आच्छादित हैं। एक लाभुक के वेतन से इस योजना मद में प्रत्येक महीने 500 रुपये कटता है और इतनी ही राशि सरकार भी देती है।
यानी एक लाभुक पर कुल 1000 रुपये प्रतिमाह इस योजना मद में जमा होता है। इस प्रकार प्रत्येक माह 60 हजार लाभुक पर करीब छह करोड़ रुपये बीमा कंपनी को भुगतान हो रहा है। इस योजना के माध्यम से सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों व उनके आश्रितों को कैशलेस और पेपरलेस चिकित्सा सुविधा मिलना है।
इसके तहत सामान्य बीमारियों में पांच लाख तक व गंभीर बीमारियों में 10 लाख तक मुफ्त इलाज होना है। इसके तहत पति, पत्नी, दो बच्चे, माता-पिता व अविवाहित बहन के इलाज का प्रविधान है।
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के पास राज्य के ऐसे अस्पतालों की लंबी सूची है, जो राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत हमारे सदस्यों के इलाज से इन्कार किए हैं। मैं स्वयं ऐसे कई अस्पताल में गया हूं और अस्पताल प्रबंधन से इसको लेकर बहस भी हो चुकी है। फिर भी इलाज नहीं हुआ। बीमा कंपनी को भी इसकी लिखित शिकायत की गई है। मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व स्वास्थ्य मंत्री डा. इरफान अंसारी को इंटरनेट मीडिया एक्स के माध्यम से आग्रह कर चुका हूं कि इस दिशा में ठोस पहल करें, ताकि बीमा मद में जा रही एक मोटी रकम का सही इस्तेमाल हो सके।
-राकेश कुमार पांडेय, प्रदेश कोषाध्यक्ष सह संयुक्त सचिव, झारखंड पुलिस एसोसिएशन।


